बाड़मेर।




राजस्थान हाईकोर्ट में पूर्व विधायक मेवाराम जैन को बड़ी राहत देते हुए सोशल मीडिया पर वायरल फर्जी वीडियो, फोटो और आपत्तिजनक वीडियो हटाने के आदेश जारी किए है।

जोधपुर हाईकोर्ट के दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायामूर्ति फरचंद अली की पीठ ने केंद्र सरकार, राजस्थान पुलिस, गूगल मेटा, फेसबुक इंस्टाग्राम,  ट्विटर को यूट्यूब को सख्त निर्देश दिए है कि याचिकाकर्ता के खिलाफ प्रसारित समस्त आपत्तिजनक कंटेंट तुरंत प्रभाव से हटा दिए जाएं।

याचिका दायर कर पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने बताया था कि उनके खिलाफ साल 2023 में एक फर्जी और अश्लील वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया गया था। इस मामले में एफआईआर दर्ज हुई थी। हालांकि जांच के बाद आरोप गलत पाए गए। कानूनी रूप से उन्हें क्लीन चिट भी मिल गई। बावजूद इसके कुछ लोग  सोशल मीडिया पर लगातार उनकी छवि खराब कर रहे हैं।



हाईकोर्ट ने इस मामले में टिप्पणी करते हुए कहा कि सोशल मीडिया पर इस तरह का कंटेंट किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, गरिमा और निजी जीवन पर गंभीर हमला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। ऐसे मामलों में देरी करना कानून और मौलिक अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने आदेश दिया कि सभी सोशल मीडिया कंपनियां तुरंत फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट हटाएं। संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड या डिएक्टिवेट किया जाए। भविष्य में दोबारा अपलोड रोकने के लिए प्रभावी सिस्टम लागू किया जाए। इस साथ ही जांच के लिए जरूरी डिजिटल सबूत सुरक्षित रखे जाएं।

कोर्ट ने इस पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया पर इस तरह का कंटेंट किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, गरिमा और निजता पर सीधा हमला है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के बाद तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि सभी सोशल मीडिया कंपनियां तुरंत फर्जी और आपत्तिजनक कंटेंट हटाएं और संबंधित अकाउंट्स को सस्पेंड या डिएक्टिवेट करें