बाड़मेर।


पचपदरा में निर्माणाधीन एचपीसीएल रिफाइनरी में हुई भीषण आगजनी और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से पहले सुरक्षा में कथित चूक को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। स्थानीय क्षेत्र के बाड़मेर-जैसलमेर बालोतरा सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने इस पूरे घटनाक्रम पर केंद्र और राज्य सरकार के रवैये को कठघरे में खड़ा करते हुए तीखी प्रतिक्रिया दी है।

सांसद बेनीवाल ने प्रेस बयान जारी कर कहा कि पचपदरा रिफाइनरी की भीषण आगजनी और प्रधानमंत्री की सुरक्षा में हुई चूक पर सरकार का रवैया ‘खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे’ जैसा नजर आ रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि 20 अप्रैल 2026 को मुख्य प्रोसेसिंग सीडीयू-वीडीयू यूनिट में लगी आग प्रधानमंत्री के 21 अप्रैल के प्रस्तावित दौरे से मात्र 20 घंटे पहले हुई, जो न केवल सुरक्षा व्यवस्था बल्कि परियोजना प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बेनीवाल ने चिंताजनक विषय बताते हुए कहा यह घटना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की छवि को प्रभावित करने वाली है और इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता।

सांसद बेनीवाल ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के चार दिन बाद भी जवाबदेही और किसी भी जिम्मेदार अधिकारी पर ठोस कार्रवाई नहीं होना बेहद चिंताजनक है। उन्होंने बताया कि अब तक केवल पचपदरा थानाधिकारी इंस्पेक्टर अचलाराम ढाका को निलंबित किया गया है, जो इस गंभीर मामले में जवाबदेही तय करने का पर्याप्त कदम नहीं माना जा सकता। यह तो लीपापोती करने जैसा प्रतीत हो रहा हैं।

सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने सरकार द्वारा दिए गए कारणों पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 20 अप्रैल को शाम 5 बजे ही पेट्रोलियम मंत्रालय ने प्रधानमंत्री के कार्यक्रम के स्थगित होने की जानकारी दे दी थी और करीब 6:50 बजे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने भी कार्यक्रम रद्द होने की पुष्टि कर दी थी। इसके बावजूद शाम 7 बजे एक युवक द्वारा खाली पांडाल में वीडियो बनाने की घटना को “प्रधानमंत्री की सुरक्षा में चूक” मानते हुए कार्रवाई करना हास्यास्पद प्रतीत होता है। उन्होंने पूछा कि जब कार्यक्रम पहले ही रद्द हो चुका था और स्थल खाली कराया जा रहा था, तब इस प्रकार की घटना को सुरक्षा चूक मानकर एसएचओ को निलंबित करना क्या न्यायसंगत है?

सांसद बेनीवाल ने रिफाइनरी में लगी आग को असली और गंभीर सुरक्षा चूक बताते हुए कहा कि इससे करोड़ों रुपये की राष्ट्रीय संपत्ति को नुकसान हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस घटना में अब तक किसी भी उच्च स्तर के अधिकारी या प्रबंधन की जवाबदेही क्यों तय नहीं की गई। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री की सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल स्थानीय पुलिस की नहीं होती, बल्कि एसपीजी और उच्च स्तरीय सुरक्षा एजेंसियों की भी होती है। ऐसे में केवल एक थानेदार पर कार्रवाई कर पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने पिछले वर्ष 25 सितंबर 2025 को बांसवाड़ा जिले के नापला गांव में प्रधानमंत्री की जनसभा के दौरान तकनीकी खराबी के मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की एक IAS अधिकारी को तत्काल प्रभाव से एपीओ कर दिया गया था। उन्होंने सवाल किया कि उस मामले में तुरंत कार्रवाई हो सकती है, तो पचपदरा जैसी गंभीर घटना में अब तक सख्त कदम क्यों नहीं उठाए गए। सांसद बेनीवाल ने आशंका जताई कि इस पूरे मामले में “बड़ी मछलियों को बचाने के लिए छोटे अधिकारियों को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।” उन्होंने सरकार से मांग की कि रिफाइनरी आगजनी और सुरक्षा चूक पर प्रथम दृष्टतया दोषियों पर  कार्रवाई क्यों नहीं की। बेनीवाल ने कहा कि “चार दिन बाद भी जवाबदेही तय न होना यह संकेत देता है कि कहीं न कहीं सच्चाई को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि आखिर किसे बचाया जा रहा है।

सांसद बेनीवाल ने मुख्य मंत्री और मुख्य सचिव के निरीक्षण पर उठाए सवाल : उन्होंने कहा कि दो-तीन बार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा व मुख्य सचिव ने तैयारियों का जायजा लिया, तो क्या उन्हें कोई खामियां नजर नहीं आईं? यदि कमियां थी, तो उन्हें दूर करना उनकी जिम्मेदारी थी। या फिर हेलीकॉप्टर का उपयोग केवल दिखावे और औपचारिक भ्रमण तक ही सीमित रह गया? यह गंभीर लापरवाही रही हैं आखिर जिम्मेदार कौन हैं कुछ तो स्पष्ट करना चाहिए।

अनुभवहीन कंपनियों को काम देने और लापरवाही की वजह से हुआ हादसा: पचपदरा में निर्माणाधीन एचआरएलएल रिफाइनरी के सीडीयू-वीडीयू यूनिट में हुई आगजनी की घटना को लेकर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने परियोजना की सुरक्षा, गुणवत्ता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए। सांसद बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजनीतिक दबाव के चलते रिफाइनरी में ऐसी कंपनियों को काम सौंपा गया, जिन्हें इस प्रकार के जटिल औद्योगिक कार्यों का पर्याप्त अनुभव नहीं था। उन्होंने कहा कि अनुभव की कमी के कारण कार्य की गुणवत्ता प्रभावित हुई, जिसका परिणाम इस तरह की गंभीर दुर्घटना के रूप में सामने आया। उन्होंने इस घटना को गंभीर लापरवाही और जल्दबाजी का नतीजा बताते हुए कहा कि जिस यूनिट का शुभारंभ प्रस्तावित था, उसी में आग लगना सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक को दर्शाता है। और कहा कि यह घटना केवल तकनीकी विफलता नहीं, बल्कि संभावित भ्रष्टाचार और प्रबंधन की लापरवाही का परिणाम है। उन्होंने उच्च स्तरीय जांच सुनिश्चित कर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए दोषियों को चिन्हित करने की भी मांग की।