दिल्ली।
केंद्र सरकार की ओर से लाए गए महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन समेत तीन अहम बिल लोकसभा में पास नहीं हो सके। लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33% आरक्षण देने से जुड़े संविधान संशोधन, परिसीमन तथा केंद्रशासित क्षेत्र कानून संशोधन विधेयकों पर पिछले दो दिनों में लोकसभा में लगभग 21 घंटे तक चर्चा हुई।
इसके बाद शुक्रवार को संविधान संशोधन विधेयक पर मतदान कराया गया। शाम 7:35 बजे परिणाम घोषित हुए। कुल 528 वोट पड़े, जिनमें 298 पक्ष में और 230 विरोध में थे। उल्लेखनीय है कि लोकसभा के कुल 540 सदस्यों में एनडीए के 293 और इंडिया गठबंधन के 233 सदस्य हैं। यानी मतदान में एनडीए को अपनी संख्या से 5 वोट अधिक और इंडिया गठबंधन को अपनी संख्या से 3 वोट कम मिले।
हालांकि, संविधान संशोधन पारित करने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट आवश्यक थे। आवश्यक बहुमत न मिलने के कारण यह विधेयक गिर गया और महिला आरक्षण एक बार फिर अटक गया।
इसके बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार की अन्य दो विधेयकों परिसीमन और केंद्र शासित क्षेत्र कानून संशोधन को आगे बढ़ाने की फिलहाल कोई मंशा नहीं है। ऐसे में यह लगभग तय माना जा रहा है कि 33% महिला आरक्षण 2029 से लागू नहीं हो पाएगा।
सरकार का तर्क था कि इन संशोधनों के माध्यम से आरक्षण को जल्द लागू करने का मार्ग प्रशस्त होगा। वर्तमान में नारी वंदन अधिनियम 2023 लागू है। जिसमें प्रावधान है कि 33% महिला आरक्षण अगली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन के आधार पर लागू किया जाएगा। इस स्थिति में अब यह माना जा रहा है कि 2034 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं को आरक्षण मिल पाना संभव नहीं होगा।
संसद में 24 साल बाद किसी सरकारी विधेयक की पराजय दर्ज की गई है। इससे पहले 2002 में आतंकवाद निवारण अधिनियम (पोटा) संसद में गिरा था, जबकि 1990 के संविधान (64वां संशोधन) विधेयक के बाद यह पहला मौका है जब कोई संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में पारित नहीं हो सका।
पिछले 30 वर्षों (1996 से 2026) में यह सातवीं बार है जब महिला आरक्षण लागू होने से पहले ही अटक गया। 1996 में देवेगौड़ा सरकार के दौरान लोकसभा भंग होने से विधेयक निरस्त हो गया, 1998 और 1999 में वाजपेयी सरकार के समय हंगामे और कोटे में कोटा विवाद के कारण सहमति नहीं बन सकी 2002-03 में क्षेत्रीय दलों के विरोध के चलते मतदान नहीं हो पाया। 2008-10 में मनमोहन सिंह सरकार के दौरान राज्यसभा से पारित होने के बावजूद लोकसभा में लंबित रहने से विधेयक लैप्स हो गया।
2023 में नारी वंदन अधिनियम पारित तो हुआ, लेकिन उसे नई जनगणना और परिसीमन से जोड़ दिया गया। अब 2026 में भी लोकसभा में मतदान के दौरान दो-तिहाई बहुमत न मिलने से यह संविधान संशोधन विधेयक गिर गया, जिससे एक बार फिर महिला आरक्षण का मुद्दा अधूरा रह गया।
