हरीश चौधरी ने कहा कि जिस सरकार ने देश की जनता को “अच्छे दिनों” का सपना दिखाया था, आज वही सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव से जूझ रही जनता को अपनी जरूरतें सीमित करने का संदेश दे रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश का मध्यम वर्ग लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान है, युवा रोजगार के अवसरों के लिए भटक रहे हैं और किसान लागत तथा बाजार संकट से जूझ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार के पास ठोस समाधान के बजाय केवल भाषण और सलाह ही बची है।
उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी जनता को राहत देना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना होता है। यदि हर संकट में सरकार अपनी जवाबदेही से बचते हुए जनता से ही त्याग और समझौते की अपेक्षा करने लगे, तो यह शासन व्यवस्था की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है।
हरीश चौधरी ने विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के तेल उत्पादन का मुद्दा उठाते हुए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में यूपीए सरकार के दौरान बाड़मेर के तेल क्षेत्रों से लगभग 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता थी, लेकिन गलत नीतियों, प्रबंधन की कमी और दूरदर्शिता के अभाव के कारण यह उत्पादन घटकर करीब 84 हजार बैरल प्रतिदिन तक सिमट गया है।
उन्होंने कहा कि यह गिरावट इस बात का प्रमाण है कि केंद्र सरकार देश के उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा क्षमता का प्रभावी उपयोग करने में विफल रही है। चौधरी ने आरोप लगाया कि सरकार जनता पर बोझ डालने के बजाय अपनी आर्थिक और ऊर्जा नीतियों की समीक्षा करे, ताकि देश को महंगाई और आर्थिक संकट से राहत मिल सके।
