खाद-बीज के 2220 सैंपल फेल, फिर भी किसानों के नुकसान की भरपाई का नियम नहीं: विधायक हरीश चौधरी ने सरकार को घेरा
जयपुर। राजस्थान विधानसभा के प्रश्नकाल में सोमवार को किसानों से जुड़ा एक बेहद गंभीर मुद्दा गूँजा। बायतु विधायक हरीश चौधरी ने प्रदेश में बिक रहे नकली और अमानक (Substandard) खाद, बीज और कीटनाशकों को लेकर सरकार से तीखे सवाल किए। विधायक ने इस बात पर गहरी चिंता जताई कि यदि घटिया कृषि सामग्री के कारण किसान की फसल बर्बाद होती है, तो सरकार के पास उसे मुआवजा देने का कोई कानूनी प्रावधान ही नहीं है।
आज विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान सदन के पटल पर जो तथ्य सामने आए, वे बेहद चिंताजनक हैं। वर्ष 2023-24 से लेकर जनवरी 2026 तक प्रदेश के विभिन्न स्थानों से लिए गए उर्वरक, बीज और कीटनाशकों के नमूनों में से कुल 2220 नमूने अमानक पाए गए। यह आँकड़ा स्वयं इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश में… pic.twitter.com/Z2Tgi2Eary
— Harish Chaudhary (@Barmer_Harish) March 9, 2026
हजारों सैंपल फेल, किसानों की मेहनत दांव पर
विधायक हरीश चौधरी ने सरकार द्वारा दिए गए आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2023 से जनवरी 2026 के बीच प्रदेश भर से लिए गए खाद, बीज और कीटनाशकों के नमूनों में से 2220 नमूने अमानक (घटिया) पाए गए हैं।
उन्होंने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा, "यह आंकड़ा इस बात का सबूत है कि बाजार में गुणवत्ता के नाम पर क्या खेल चल रहा है। किसान पहले से ही मौसम की मार और पानी की कमी झेल रहा है, ऊपर से उसे नकली बीज और खाद थमा दिए जाते हैं। जब फसल खराब होती है, तो किसान की पूरे साल की मेहनत और जमापूंजी डूब जाती है।"
मुआवजे का प्रावधान नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण
सदन में चर्चा के दौरान जब यह बात सामने आई कि नकली खाद-बीज से हुए खराबे की भरपाई का सरकार के पास कोई नियम नहीं है, तो विधायक ने इसे 'अन्याय' करार दिया। उन्होंने कहा कि सरकार का यह जवाब कि 'क्षतिपूर्ति का कोई प्रावधान नहीं है', प्रदेश के लाखों किसानों के लिए चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
विधायक की सरकार से प्रमुख मांगें:
हरीश चौधरी ने विधानसभा में सरकार से मांग की है कि किसानों के हितों की रक्षा के लिए एक ठोस कार्ययोजना और रोडमैप तैयार किया जाए। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
- सख्त कानून बने: नकली और घटिया कृषि सामग्री बेचने वाली कंपनियों और डीलरों के खिलाफ कठोर दंडात्मक प्रावधान हों।
- मुआवजा नीति: यदि अमानक सामग्री के कारण किसान की फसल खराब होती है, तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाए और किसान को मुआवजा मिले।
- पारदर्शी जांच: पूरे प्रदेश में खाद-बीज की सैंपलिंग और जांच की व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाया जाए।
निष्कर्ष
विधायक ने साफ तौर पर कहा कि केवल सैंपलिंग करना काफी नहीं है, बल्कि दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो एक मिसाल बने। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह जल्द से जल्द इस विषय पर कानून बनाए ताकि भविष्य में किसी भी किसान को सिस्टम की लापरवाही की कीमत अपनी मेहनत की बर्बादी से न चुकानी पड़े।
