यह सनसनीखेज मामला 15 अप्रैल 2015 का है, जब आरोपी दिनेश उर्फ दिनीया और श्रीराम उर्फ संजय (डोडा पोस्त) से भरी पिकअप लेकर राजसमंद से गुजर रहे थे। पुलिस को सूचना मिलने के बाद दिवेर थाना पुलिस ने सातपालिया सर्किल पर नाकाबंदी कर रखी थी।
जैसे ही संदिग्ध पिकअप वहां पहुंची, पुलिस को देखकर आरोपी घबरा गए और गाड़ी रिवर्स कर भागने लगे। इसी दौरान दिनेश ने पुलिस टीम पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की, लेकिन आरोपी नहीं रुके।
फायरिंग के दौरान एक गोली पुलिस जीप का कांच तोड़ते हुए थानाधिकारी रमेश कविया के सिर में जा लगी। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया, जहां ऑपरेशन कर गोली निकाली गई। घटना के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गए।
बाद में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया। मामले में हत्या के प्रयास, आर्म्स एक्ट और पीडीपीपी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट कोर्ट में पेश की गई।
ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने 21 गवाह और 35 दस्तावेज पेश किए। सभी साक्ष्यों और दलीलों को सुनने के बाद कोर्ट ने दोनों आरोपियों को दोषी करार देते हुए 7-7 साल की सजा सुनाई।
