राजधानी जयापुर में भंडारी हॉस्पिटल से जुड़े कथित वित्तीय गड़बड़ी और साइबर धोखाधड़ी मामले में साइबर पुलिस थाना ने बड़ी कार्रवाई करते हुए अस्पताल के कार्यकारी सहायक मनीष कुमारा सोनी को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर मरीजों से प्राप्त रकम को अस्पताल के खातों में जमा कराने के बजाय अपने निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करने का आरोप है। प्रारंभिकी जांच में करीब 80 से 90 लाख रुपए के गबन की बात सामने आई है।
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी मनीष कुमार सोनी, राजेंद्र कुमार सोनी का पुत्र है और भंडारी हॉस्पिटल में कार्यकारी सहायक के पद पर कार्यरत था। जांच एजेंसियों को मिले डिजिटल और बैंकिंग रिकॉर्ड में सामने आया कि आरोपी ने सुनियोजित तरीके से मरीजों से ली गई राशि को अस्पताल तक पहुंचाने के बजाय अपने व्यक्तिगत खातों में ट्रांसफर किया।
फर्जी वेबसाइट बनाकर डॉक्टर के नाम का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने refrens.com वेबसाइट पर अस्पताल से संबंधित एक फर्जी अकाउंट तैयार किया। आरोप है कि इस अकाउंट के जरिए उसने डॉ. चिराग भंडारी के नाम और पहचान का इस्तेमाल करते हुए मरीजों से ऑनलाइन भुगतान वसूला। मरीजों को यह विश्वास दिलाया गया कि वे अस्पताल को अधिकृत भुगतान कर रहे हैं, जबकि रकम सीधे आरोपी के खातों में जा रही थी।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ आईटी एक्ट की धारा 66D के तहत केस दर्ज किया है। यह धारा ऑनलाइन प्रतिरूपण और धोखाधड़ी से संबंधित अपराधों पर लागू होती है।
डिजिटल साक्ष्य और बैंक ट्रांजैक्शन की जांच जारी
साइबर पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी को शनिवार को अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट क्रम संख्या-16, जयपुर मेट्रो प्रथम के समक्ष पेश किया जाएगा। फिलहाल पुलिस आरोपी के मोबाइल, लैपटॉप, बैंक खातों और ऑनलाइन पेमेंट रिकॉर्ड की फॉरेंसिक जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में और भी खुलासे हो सकते हैं।
“ट्राइमेक्स” इंजेक्शन को लेकर भी जांच
इसी मामले से जुड़े एक अन्य घटनाक्रम में सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) और राजस्थान ड्रग कंट्रोल विभाग ने गोपालपुरा बाइपास स्थित भंडारी हॉस्पिटल पर छापा मारा था। विभाग को शिकायत मिली थी कि “ट्राइमेक्स” नाम से एक बिना अनुमोदन वाला इंजेक्शन ऑनलाइन बेचा जा रहा है।
राजस्थान के ड्रग कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार “ट्राइमेक्स” नाम का कोई इंजेक्शन विभाग में पंजीकृत नहीं है। जांच में सामने आया कि यह इंजेक्शन ‘पौपावेरिन’, ‘एल्प्रोस्टैडिल’ और ‘क्लोरप्रोमाजिन’ दवाओं के मिश्रण से तैयार किया जा रहा था। विभाग ने अस्पताल से जुड़े दस्तावेज जब्त कर विस्तृत जांच शुरू कर दी है।
अस्पताल प्रशासन ने आरोपी पर डाला पूरा दोष
वहीं भंडारी हॉस्पिटल प्रशासन ने पूरे मामले में सफाई देते हुए दावा किया है कि यह पूरा फर्जीवाड़ा मनीष कुमार सोनी ने “ओमेन फार्मेसी” कंपनी के नाम से किया। अस्पताल का कहना है कि आरोपी ने डॉक्टर के फर्जी हस्ताक्षर कर मरीजों से पैसे अपने निजी खातों में जमा करवाए और अस्पताल प्रबंधन को इसकी जानकारी नहीं थी।