बाड़मेर
निजीकरण के खिलाफ भारतीय मजदूर संघ का शंखनाद
निजीकरण के विरोध में बुधवार को राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के आह्वान पर डिस्कॉम के उपखंड कार्यालयो पर प्रदर्शन एवं ज्ञापन सौपे। जोधपुर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ के महामंत्री जनक गहलोत ने बताया कि जोधपुर डिस्कॉम के प्रत्येक व्रत के उपखंड से अधिक से अधिकम संख्या में ऊर्जा मंत्री राजस्थान सरकार एवं प्रमुख शासन सचिव ऊर्जा विभाग को ज्ञापन प्रेषित किए गए।
उन्होंने बताया कि इन ज्ञापन में प्रमुख मांग निजीकरण नहीं करने एवं कर्मचारीयो की समस्याओं का शीघ्र समाधान करने की मांग की गई। जोधपुर विद्युत वितरण निगम श्रमिक संघ के अध्यक्ष नवजीत सिंह पवार ने बताया कि जोधपुर डिस्कॉम के बाड़मेर, बालोतरा, जैसलमेर, जालौर, जोधपुर शहर, जोधपुर ग्रामीण, पाली, फलोदी, बीकानेर, श्रीगंगानगर और चूरू सर्कल के सहायक अभियंताओं के माध्यम से ज्ञापन प्रस्तुत किए गए।
उन्होंने कहा कि मांग की गई कि अगर समय रहते कर्मचारियों की मांगो को पूरा नहीं किया जाता है तो संगठन अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करेगा। जिसकी समस्त जिम्मेदारी निगम प्रशासन की होगी।
आन्दोलन के प्रथम चरण में प्रत्येक उपखण्ड से दिये ज्ञापन
भारतीय मजदूर संघ की विद्युत इकाई जोधपुर डिस्कॉम श्रमिक संध व राजस्थान विद्युत श्रमिक महासंघ के प्रदेशव्यापी आहवान पर शासन सचिव महोदया, उर्जा विभाग राजस्थान सरकार को आज विद्युत निगमों के अलग-अलग नामों से हो रहे निजीकरण को बन्द करने के लिए प्रत्येक उपखण्ड से ज्ञापन दिए। जिसमें निजीकरण के खिलाफ आन्दोलन का प्रथम चरण उपखण्ड कार्यालय से उसके बाद जिला स्तर पर धरना प्रदर्शन व निगम स्तर पर व जयपुर तक चरणबध विरोध प्रकट किया जाएगा।
वृत कार्यकारी अध्यक्ष आईदानसिंह ईन्दा ने बताया कि निगम के कुप्रबंधन के कारण व नाजायज ठेकेदारी प्रथा को बढ़ावा देने के कारण विद्युत निगम दिनों दिन घाटे में जा रहा हैं। हजारों करोड़ रूपये अलग-अलग ठेका कार्यों में पानी की तरह बहाया जा रहा है चाहे वो एफ आर टी हो, चाहे वो टोली माउन्टेड केन हो, चाहे बीसीआईटीएस हो, चाहे उपकरण खरीद हो, टांसफार्मर रिपेयरिंग, झाड़ी कटिंग, अर्थिग, फेंसिंग, फीडर रिनोवेशन, मेटेरियल खरीद, मीटर खरीद आदि कई कार्यों में प्रबंधन द्वारा पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है जिस पर कोई कन्टोल नहीं हैं। घाटे से उबरने के लिए डिस्कॉम को अलग-अलग तरिके से पूंजीपतियों को कैसे बेचा जाए एसे ही जतन किए जा रहे है। आमजन के टैक्स के पैसे से बने इतने बड़े इन्फारटक्चर को फी में ही कम्पनियों को सौपा जा रहा है। तथा जहां पहले से ही मुनाफे में है उन्ही जिलों को दिया जा रहा है।
निजीकरण से कर्मचारियों के साथ साथ आमजन व किसानों को भी भारी नुकसान होगा बिजली की दरों में बढोतरी, सब्सीडी को समाप्त करने जैसे कदम उठाए जा सकते है। राजनैतिक हस्तक्षेप समाप्त होगा जिससे कम्पनी आमजन नहीं सुनेगी।
भारतीय मजदूर संघ राष्ट हित उद्योग हित श्रमिक हित की रीती निती पर चलता है इसिलिए निजीकरण के खिलाफ आन्दोलनरत है। जब तक सरकार सकारात्मक वार्ता नहीं करती आन्दोलन जारी रहेगा।
