हनुमान बेनीवाल ने अपने स्वभाव की तुलना जसवंत सिंह जसोल से की है। बेनीवाल ने कहा कि "जसवंत सिंह जी एक ऐसे कद्दावर व्यक्तित्व थे, जिन्होंने वसुंधरा राजे को राजनीति में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। लेकिन, जब वसुंधरा राजे मुख्यमंत्री बनीं, तो उन्होंने जसवंत सिंह जी की बातों को अनसुना करना शुरू कर दिया। इस पर उन्होंने बड़े ही स्वाभिमान के साथ कहा था "अब कौन सा योद्धा उनके खिलाफ खड़ा होगा ?"

मुझे स्मरण है कि उस चुनाव में जसवंत सिंह जसोल को, निर्दलीय प्रत्याशी होने के बावजूद 3 लाख से अधिक मत प्राप्त हुए थे। बाड़मेर की मुस्लिम जनता ने भी उन्हें भारी समर्थन दिया था। उनके प्रति लोगों का यह स्नेह और जुड़ाव वास्तव में अतुलनीय था।

हाल ही में जब मैं मानवेंद्र सिंह जसोल के पुत्र के विवाह समारोह में शामिल हुआ तो पुरानी यादें फिर से ताज़ा हो गईं। मानवेंद्र सिंह से मेरी पुरानी और गहरी मित्रता है। वे अत्यंत सज्जन व्यक्ति हैं। उन्होंने कभी किसी का अहित नहीं किया और अपने सहयोगियों के प्रति सदैव समर्पित रहे।

बेनीवाल ने स्व. जसोल के स्वभाव से की अपनी तुलना
बेनीवाल ने कहा कि "जसवंत सिंह जसोल मारवाड़ और राजस्थान की संस्कृति के सच्चे संरक्षक थे। उनका स्वभाव थोड़ा उग्र अवश्य था। किंतु, वे अपने सिद्धांतों पर अडिग रहने वाले व्यक्तित्व थे। उनका वह ‘गुस्सा’ दरसअल उनके मूल्यों और सिद्धांतों के प्रति उनकी दृढ़ प्रतिबद्धता का प्रतीक था। संभवतः इसी कारण मेरा उनसे एक स्वाभाविक जुड़ाव रहा। क्योंकि, कहीं न कहीं मेरा स्वभाव भी उनसे मिलता-जुलता है।"