बाड़मेर। नगर परिषद के प्रशासक व अतिरिक्त जिला कलेक्टर राजेंद्रसिंह चांदावत, तत्कालीन आयुक्त व यूआईटी सचिव श्रवणसिंह राजावत ओर मगाराम के खिलाफ शहर के पॉश कॉलोनी में स्थित नगर परिषद के स्वामित्व के बेशकीमती एक भूखंड के नीलामी मामले को लेकर कोर्ट के आदेश पर खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज हुआ है। 


एफआईआर के अनुसार परिवादी सज्जन सिंह ने बाड़मेर नगरपरिषद के प्रशासनिक अधिकारी राजेंद्रसिंह, आयुक्त श्रवणसिंह राजावत और मगाराम सहित अन्य आरोपियों ने नगरपरिषद के स्वामित्व महावीर नगर स्थित जे-08 भूखंड को नीलाम कर राजकोष में पैसा जमा करने के बजाय, उसे निजी स्वार्थ के लिए फर्जी दस्तावेजों के आधार पर खुर्द-बुर्द कर दिया। 

परिवादी ने 3 मई 2025 को इस मामले को लेकर कोतवाली थाने में रिपोर्ट पेश दी थी लेकिन एफआईआर दर्ज नही हुई। जिसके बाद परिवादी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया ओर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बाड़मेर के समक्ष गुहार लगाई। अदालत के कड़े रुख के बाद अब विभिन्न धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। 

कोर्ट के आदेश पर दर्ज केस में सीधे तौर पर तत्कालीन आयुक्त, नगरपरिषद बाड़मेर और प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्य आरोपी बनाया गया है। पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी, फर्जी दस्तावेज बनाना और इस्तेमाल करना, लोक सेवक द्वारा कानून की अवज्ञा, आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं लगाकर मामला दर्ज किया है।

तत्कालीन आयुक्त नगरपरिषद व सचिव यूआईटी बाड़मेर श्रवण सिंह राजावत का कहना है कि हमारे पर लगाए गए आरोप तथ्यहीन हैं। यह मेरे और प्रशासक, एडीएम राजेंद्र सिंह चांदावत के कार्यकाल से पहले का मामला है। इस भूखंड का बेचान 2020 में हुआ था। फिलहाल कोतवाली थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच पड़ताल शुरू कर दी है।