करीब तीन दशक तक पुलिस को चकमा देने वाला करोड़ों रुपए की ठगी का मास्टरमाइंड आखिरकार कानून के शिकंजे में आ गया। गुजरात के अहमदाबाद में फर्जी पहचान के साथ छिपकर रह रहे आरोपी को एएनटीएफ टीम ने सादे कपड़ों में ग्राहक बनकर धर दबोचा। आरोपी अपने भाई के साथ 27 साल से फरार था, जबकि कोरोना काल में उसके भाई की मौत हो चुकी है।

1994 में शुरू हुआ ठगी का खेल

बाड़मेर के आजाद चौक निवासी मनोज और उसके भाई हेमराज ने वर्ष 1994 में ‘कैरीयर सेविंग्स एंड इन्वेस्टर इंडिया लिमिटेड’ नाम से फर्जी निवेश कंपनी बनाई। दोनों ने लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच देकर सैकड़ों निवेशकों से करोड़ों रुपए जमा करवा लिए। नेटवर्क इतना बड़ा हो गया कि 16 ब्रांच तक खोल दी गईं।
मामला दर्ज होते ही हो गए फरार
1999 में ठगी का मामला दर्ज होने के बाद दोनों भाई बाड़मेर से फरार हो गए। इसके बाद जयपुर, दिल्ली और अहमदाबाद में अलग-अलग ठिकानों पर छिपकर रहने लगे। पुलिस से बचने के लिए लगातार नाम और पहचान बदलते रहे।
अहमदाबाद में ‘कुमार’ बनकर बस गया आरोपी
फरारी के दौरान मनोज ने अपनी पहचान बदलकर ‘कुमार’ नाम रख लिया और अहमदाबाद में प्रिंटिंग प्रेस का काम शुरू कर दिया। शुरुआत में मजदूरी की और बाद में ‘डोटकॉम बाइंडर’ व ‘कुमार इन्फो’ नाम से खुद का प्रेस खोल लिया। उसने रिश्तेदारों से भी पूरी तरह दूरी बना ली थी।
नशा तस्करी जांच में खुला राज
एएनटीएफ टीम पश्चिमी राजस्थान में नशा तस्करी नेटवर्क की जांच के सिलसिले में गुजरात पहुंची थी। इसी दौरान संदिग्ध कारोबार की सूचना मिली। जांच में सामने आया कि मनोज और उसका भाई 1999 से फरार हैं और उनके खिलाफ बाड़मेर, बालोतरा और जालोर में कई मामले दर्ज हैं।
ग्राहक बनकर किया गिरफ्तार
टीम ने आरोपी की प्रिंटिंग प्रेस पर ग्राहक बनकर दबिश दी। फ्लेक्स-बैनर बनवाने के बहाने बातचीत की गई और जैसे ही आरोपी सामने आया, पहले से मौजूद फोटो से पहचान कर उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी पर 26 हजार रुपए का इनाम भी घोषित था।