धरनास्थल पर लगातार ग्रामीणों, श्रमिकों, युवाओं और सामाजिक संगठनों की भीड़ बढ़ रही है। आंदोलन अब केवल मजदूरों की मांगों तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह स्थानीय अधिकार, रोजगार सुरक्षा, श्रमिक सम्मान, पर्यावरण संरक्षण और कॉर्पोरेट जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
मीडिया के साथ माइंस का निरीक्षण, सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल
बुधवार को विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने मीडिया प्रतिनिधियों को साथ लेकर RSMML द्वारा संचालित गिरल लिग्नाइट माइंस का विस्तृत निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान खनन क्षेत्र में सुरक्षा नियमों और श्रमिक हितों से जुड़े मानकों की कथित अनदेखी सामने आई।
मौके पर कई ऐसे दृश्य देखने को मिले जिन्होंने कंपनी प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए। भारी मशीनरी और खनन क्षेत्रों में सुरक्षा मानकों की कमी साफ दिखाई दी। श्रमिकों के लिए आवश्यक सुरक्षा संसाधन और मूलभूत व्यवस्थाएं कई स्थानों पर अपर्याप्त नजर आईं।
मीडिया से बातचीत में विधायक भाटी ने कहा कि करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाली कंपनी यदि श्रमिकों की सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं तक का ध्यान नहीं रख पा रही है तो यह बेहद गंभीर विषय है। उन्होंने कहा कि मजदूर किसी उद्योग की रीढ़ होते हैं और उनके साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण के दावों पर भी उठा विवाद
निरीक्षण के दौरान पर्यावरण से जुड़ा एक और बड़ा मामला सामने आया। विधायक भाटी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने शीशम और नीम जैसे पर्यावरण हितैषी पौधे लगाने के नाम पर सरकारी धन प्राप्त किया, लेकिन धरातल पर स्थिति अलग दिखाई दी।
उन्होंने दावा किया कि जिन क्षेत्रों में हरियाली विकसित करने के दावे किए गए थे, वहां बड़ी संख्या में अंग्रेजी बबूल के पेड़ पाए गए। अंग्रेजी बबूल को पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माना जाता है और कई इलाकों में इन्हें हटाने के लिए सरकार अलग बजट खर्च करती है।
भाटी ने इसे गंभीर अनियमितता बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि रेगिस्तानी क्षेत्र पहले से पर्यावरणीय चुनौतियों से जूझ रहा है और ऐसी लापरवाही भविष्य के लिए खतरा बन सकती है।
धरने के तीसरे दिन कंपनी प्रतिनिधिमंडल पहुंचा
लगातार बढ़ते दबाव और जनसमर्थन के बीच धरने के तीसरे दिन RSMML का एक प्रतिनिधिमंडल आंदोलनरत ग्रामीणों और श्रमिकों से मिलने पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलनकारियों की मांगों को सुना और वार्ता के जरिए समाधान का आश्वासन दिया।
धरने पर बैठे श्रमिकों और ग्रामीणों ने कंपनी के सामने कई प्रमुख मांगें रखीं। इनमें हटाए गए 100 से अधिक ड्राइवरों को दोबारा काम पर रखने की मांग प्रमुख रही। इसके अलावा सभी श्रमिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी तय करने, स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, उच्च कुशल श्रेणी के अनुसार वेतन देने और बोनस एक्ट 1965 के तहत बोनस उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई।
श्रमिकों ने कहा कि लंबे समय से उनकी समस्याओं को अनदेखा किया जा रहा था, जिसके बाद उन्हें आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। उनका आरोप है कि कंपनी केवल उत्पादन और मुनाफे पर ध्यान दे रही है जबकि श्रमिक अधिकारों और सम्मान की लगातार अनदेखी हो रही है।
“ग्रामीणों की आवाज दबाने नहीं देंगे” — भाटी
धरनास्थल पर मौजूद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंपनी प्रबंधन को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि ग्रामीणों और श्रमिकों की जायज मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और बड़े स्तर तक ले जाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं बल्कि क्षेत्र के लोगों के अधिकार और सम्मान की लड़ाई है। स्थानीय युवाओं को रोजगार से बाहर करना, श्रमिकों पर अत्यधिक कार्यभार डालना और सुरक्षा मानकों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।
भाटी ने स्पष्ट कहा कि जब तक श्रमिकों और ग्रामीणों को न्याय नहीं मिलता, वे धरनास्थल पर उनके साथ मजबूती से खड़े रहेंगे।
