बाड़मेर जिले की गिरल लिग्नाइट माइंस में श्रमिकों और ग्रामीणों का आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। लगातार चौथे दिन भी आंदोलनकारियों का धरना जारी रहा और शिव विधायक Ravindra Singh Bhati धरनास्थल पर डटे रहे। पिछले तीन दिनों से वहीं रात्रि विश्राम कर रहे विधायक भाटी ने साफ शब्दों में कहा कि “जब तक श्रमिकों को न्याय नहीं मिलेगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।”
करीब 29 दिनों से चल रहे इस आंदोलन को अब व्यापक जनसमर्थन मिलने लगा है। गुरुवार को भी बड़ी संख्या में ग्रामीण, श्रमिक, युवा और आसपास के इलाकों से लोग धरनास्थल पहुंचे। आंदोलन अब केवल श्रमिकों की मांगों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्थानीय अधिकार, रोजगार सुरक्षा, श्रमिक सम्मान और प्रशासनिक जवाबदेही का बड़ा मुद्दा बन चुका है।
स्थानीय युवाओं के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं” — भाटी
धरनास्थल को संबोधित करते हुए विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने कंपनी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्षों से स्थानीय श्रमिकों और ड्राइवरों के साथ अन्याय किया जा रहा है। क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने के बजाय बाहर का रास्ता दिखाया जा रहा है, जिसे किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा।
भाटी ने कहा कि कंपनी द्वारा हटाए गए 100 से अधिक ड्राइवरों और श्रमिकों को तुरंत वापस काम पर लिया जाए। साथ ही 12-12 घंटे की ड्यूटी व्यवस्था समाप्त कर 8 घंटे की शिफ्ट लागू की जाए।
उन्होंने कहा—
“यह लड़ाई सिर्फ नौकरी की नहीं, बल्कि सम्मान और अधिकार की लड़ाई है। मजदूरों को उनका हक दिलाकर ही हम वापस लौटेंगे।”
विधायक ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और बड़े स्तर तक ले जाया जाएगा।
माइंस निरीक्षण के बाद सुरक्षा और पर्यावरण पर उठे सवाल
धरने के चौथे दिन भी बुधवार को हुए माइंस निरीक्षण की चर्चा बनी रही। विधायक भाटी मीडिया को साथ लेकर माइंस क्षेत्र में पहुंचे थे, जहां सुरक्षा मानकों और पर्यावरणीय व्यवस्थाओं को लेकर कई सवाल खड़े हुए।
निरीक्षण के दौरान कई स्थानों पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी सामने आने का दावा किया गया। श्रमिकों ने आरोप लगाया कि उन्हें पर्याप्त सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध नहीं करवाई जा रहीं।
वहीं पर्यावरण संरक्षण को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है। विधायक भाटी ने आरोप लगाया कि कंपनी ने सरकार से नीम और शीशम जैसे उपयोगी पौधे लगाने के नाम पर राशि ली, लेकिन मौके पर अंग्रेजी बबूल पाए गए, जिन्हें पर्यावरण के लिए नुकसानदायक माना जाता है।
इस खुलासे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल तेज हो गई है।
आश्वासन मिला, लेकिन समाधान नहीं
धरने के तीसरे दिन आरएसएमएमएल का प्रतिनिधिमंडल आंदोलनकारियों से मिलने पहुंचा था। प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों की मांगों को उच्च स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया, लेकिन अब तक किसी प्रकार की लिखित सहमति या ठोस निर्णय सामने नहीं आया है।
इसी कारण आंदोलनकारी फिलहाल पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। धरनास्थल पर मौजूद श्रमिकों का कहना है कि यह संघर्ष उनके रोजगार, परिवार और भविष्य से जुड़ा हुआ है।
ये हैं आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
आंदोलनरत श्रमिकों और ग्रामीणों ने कंपनी के सामने कई मांगें रखी हैं, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
100 से अधिक निकाले गए ड्राइवरों और श्रमिकों की पुनर्बहाली
सभी श्रमिकों के लिए 8 घंटे की ड्यूटी लागू करना
स्थानीय युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता
उच्च कुशल वर्ग के अनुसार वेतन निर्धारण
बोनस एक्ट 1965 के अनुसार बोनस
आईडी कार्ड, वेतन स्लिप और गेट पास जैसी सुविधाएं उपलब्ध करवाना
आंदोलन को मिल रहा व्यापक जनसमर्थन
गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन अब पूरे बाड़मेर क्षेत्र में चर्चा का विषय बन चुका है। लगातार चौथे दिन भी धरनास्थल पर लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। ग्रामीणों और युवाओं में कंपनी के रवैये को लेकर नाराजगी स्पष्ट नजर आई।