जम्मू-कश्मीर की एक युवती को लेकर दो युवकों के बीच दावा किए जाने से एक अनोखी प्रेम कहानी कानूनी पेच में फंस गई है। इस मामले में राजस्थान और जम्मू-कश्मीर दोनों राज्यों का सीधा संबंध सामने आया है। खास बात यह है कि दोनों युवक युवती को अपनी पत्नी बताते हुए अलग-अलग हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुके हैं।

मामला जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले की रहने वाली शकीला अख्तर से जुड़ा है, जिसकी तलाश राजस्थान पुलिस पिछले कुछ समय से कर रही है। राजस्थान के डीडवाना-कुचामन जिले के बरड़वा थाना क्षेत्र के सुदरासन गांव निवासी जितेंद्र सिंह ने राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर मुख्यपीठ में बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका दायर की है।

जितेंद्र सिंह का दावा है कि उन्होंने 16 फरवरी 2025 को पंजाब के फिरोजपुर में शकीला अख्तर से शादी की थी। उन्होंने अपनी याचिका के साथ शादी से जुड़े दस्तावेज और लिव-इन रिलेशनशिप का सर्टिफिकेट भी अदालत में पेश किया है। जितेंद्र ने कोर्ट से मांग की है कि शकीला को उसके सामने पेश किया जाए और उसे उसके साथ भेजा जाए।

इस मामले में आज मंगलवार को राजस्थान हाईकोर्ट जोधपुर में सुनवाई प्रस्तावित है। यह केस जस्टिस फरजंद अली की अदालत में सूचीबद्ध है। सुनवाई के दौरान डीडवाना के बरड़वा थाना प्रभारी महेंद्र सिंह भी अब तक की जांच से जुड़े दस्तावेजों के साथ अदालत में मौजूद रहेंगे।

दूसरी ओर, जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट में भी इसी युवती से जुड़ा एक अलग मामला चल रहा है। वहां शब्बीर अहमद खान नाम के युवक ने शकीला को अपनी पत्नी बताते हुए याचिका दायर की है। इस मामले की सुनवाई 13 मार्च को प्रस्तावित है।

शब्बीर अहमद खान ने श्रीनगर हाईकोर्ट में पेश किए गए निकाहनामे में दावा किया है कि 12 जून 2024 को दोनों का निकाह हुआ था। उसने अदालत से यह भी मांग की है कि दोनों को सुरक्षा प्रदान की जाए क्योंकि उनके परिजन इस निकाह को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं। श्रीनगर हाईकोर्ट ने इस मामले में पुलिस अधिकारियों को आवश्यक निर्देश भी जारी किए हैं।

इधर राजस्थान हाईकोर्ट के निर्देश पर बरड़वा थाना पुलिस ने सीआरपीएफ की मदद से जम्मू-कश्मीर में शकीला की तलाश के लिए सर्च अभियान चलाया। पुलिस ने अनंतनाग समेत कई स्थानों पर जांच की, लेकिन अब तक न तो शकीला का कोई सुराग मिला है और न ही शब्बीर अहमद खान का पता चल पाया है।

जितेंद्र सिंह के अनुसार वह एक कंपनी में ठेके पर काम करने के लिए जम्मू गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात शकीला से हुई और दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ गईं। बाद में परिवार की सहमति से दोनों ने पंजाब के फिरोजपुर में शादी कर ली और साथ रहने लगे।

जितेंद्र का आरोप है कि बाद में शकीला के परिजनों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसके बाद जम्मू पुलिस ने दोनों को पकड़ लिया और शकीला को अपने साथ जम्मू ले गई। हालांकि उस समय शकीला ने जितेंद्र के खिलाफ कोई बयान नहीं दिया, लेकिन इसके बावजूद उसे जितेंद्र के साथ नहीं भेजा गया। इसके बाद जितेंद्र ने न्याय के लिए राजस्थान हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

इस मामले की पहली सुनवाई 30 अक्टूबर 2025 को राजस्थान हाईकोर्ट में हुई थी। उसी दिन अदालत ने प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर अगली सुनवाई पर युवती को पेश करने के निर्देश दिए थे। 30 अक्टूबर 2025 से 23 फरवरी 2026 के बीच इस मामले में सात अलग-अलग तारीखों पर सुनवाई हो चुकी है।

सबसे ताजा आदेश 23 फरवरी 2026 को आया था, जिसमें सरकारी वकील ने युवती की तलाश के लिए अदालत से और समय मांगा था। इसके बाद जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई 10 मार्च 2026 तय की।

इससे पहले 29 जनवरी 2026 को जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्रशेखर शर्मा की खंडपीठ ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया था कि वह उस इलाके में तैनात सीआरपीएफ और अन्य अर्द्धसैनिक बलों की मदद लेकर युवती की तलाश करें।

फिलहाल युवती का कोई पता नहीं चल पाया है और दोनों राज्यों की अदालतों में चल रही सुनवाई ने इस प्रेम कहानी को और रहस्यमय बना दिया है।