जैसलमेर की 'सस्ती डेटिंग' का AI घोटाला: 3 रुपए में 10 हजार लड़कियां? विज्ञापन ने उड़ाई संस्कृति की धज्जियां, पुलिस अलर्ट
जैसलमेर (राजस्थान) में एक AI-जनरित फर्जी विज्ञापन वायरल होने से बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इंस्टाग्राम पर प्रसारित इस AI वीडियो में दावा किया गया है कि जैसलमेर (पोकरण, सम, फतेहगढ़, रामगढ़ आदि इलाकों) की 10 हजार लड़कियां महज 3 रुपए में एक डेटिंग/वीडियो कॉल ऐप पर उपलब्ध हैं।
जैसलमेर, 18 जनवरी 2026: राजस्थान के सुनहरे रेगिस्तान वाले जैसलमेर को अब एक नए विवाद ने घेर लिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक AI-जनित विज्ञापन दावा कर रहा है कि यहां की 10 हजार लड़कियां महज 3 रुपए में डेटिंग ऐप पर उपलब्ध हैं। यह फर्जी प्रचार न सिर्फ स्थानीय संस्कृति को बदनाम कर रहा है, बल्कि महिलाओं की गरिमा पर भी हमला है। विज्ञापन के सामने आने के बाद स्थानीय लोग भड़क उठे हैं, और पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। क्या यह महज एक ऐप का प्रमोशन है या जिले की छवि खराब करने की बड़ी साजिश? आइए जानते हैं पूरी कहानी।
विज्ञापन का भ्रामक दावा: AI ने रची फर्जी दुनिया
इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर तेजी से फैल रहा यह विज्ञापन वीडियो AI तकनीक का घोर दुरुपयोग है। वीडियो में ग्रामीण परिवेश के पुरुषों और महिलाओं के डीपफेक दृश्य दिखाए गए हैं, जहां स्थानीय पहनावे और रेगिस्तानी पृष्ठभूमि का इस्तेमाल कर जैसलमेर को बदनाम किया गया है। दावा है कि 'पोकरण, सम, फतेहगढ़ और रामगढ़' जैसे इलाकों की लड़कियां एक ऐप पर 'एक्टिव' हैं और महज 3 रुपए में डेटिंग के लिए तैयार। वीडियो के दृश्य इतने अश्लील और अपमानजनक हैं कि वे जैसलमेर की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से मेल नहीं खाते।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह विज्ञापन न केवल महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई कर रहा है, बल्कि पर्यटन के लिए मशहूर इस जिले की छवि को भी धूमिल कर रहा है। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "हमारा जैसलमेर किले, थार रेगिस्तान और लोक संगीत के लिए जाना जाता है, न कि ऐसे सस्ते और फर्जी दावों के लिए। यह AI का इस्तेमाल कर हमारी संस्कृति पर हमला है।"
लोगों की नाराजगी: साजिश की आशंका, IT एक्ट के तहत कार्रवाई की मांग
विज्ञापन के वायरल होने के बाद जैसलमेर के प्रबुद्धजन और सामाजिक संगठन सड़कों पर उतर आए हैं। उनका मानना है कि यह 'डीपफेक' तकनीक से बना वीडियो जानबूझकर तैयार किया गया है, जिसमें स्थानीय तत्वों का इस्तेमाल कर जिले को बदनाम करने की कोशिश की गई है। कई लोगों ने इसे महज विज्ञापन नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिष्ठा को चोट पहुंचाने की साजिश बताया है।
सोशल मीडिया पर हैशटैग #SaveJaisalmerCulture ट्रेंड कर रहा है, जहां यूजर्स ने जिला प्रशासन और पुलिस की साइबर सेल से तुरंत कार्रवाई की मांग की है। एक सामाजिक कार्यकर्ता ने कहा, "AI से फर्जी कंटेंट बनाने वाली कंपनी और इसे प्रमोट करने वाले अकाउंट्स को गिरफ्तार किया जाए। IT एक्ट की धाराओं के तहत कड़ी सजा दी जानी चाहिए, ताकि ऐसी हरकतें दोबारा न हों।" कई महिलाओं ने भी इस विज्ञापन को महिलाओं के खिलाफ अपराध बताते हुए विरोध जताया है।
पुलिस की जांच: ऐप का पता लगाने में जुटी टीम
मामले की गंभीरता को देखते हुए जैसलमेर पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया है। एसपी अभिषेक शिवहरे ने बताया कि पुलिस ने डेटिंग ऐप की छानबीन शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, "हम जांच कर रहे हैं कि यह ऐप कहां से रजिस्टर्ड है और इसे कौन हैंडल कर रहा है। ऐसी भ्रामक और अपमानजनक हरकतों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।" साइबर सेल की टीम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से विज्ञापन हटवाने और उसके स्रोत का पता लगाने में जुटी है। सूत्रों के मुताबिक, ऐप संभवत: विदेशी सर्वर से चलाया जा रहा है, जिसकी वजह से जांच में समय लग सकता है।
पहले भी हुए विवाद: कालबेलिया डांस पर उठा था बवाल
यह पहली बार नहीं है जब जैसलमेर की सांस्कृतिक छवि पर सवाल उठे हैं। कुछ साल पहले कालबेलिया डांस को लेकर बड़ा विवाद हुआ था। तब कई रिसॉर्ट्स में कालबेलिया डांस के नाम पर अश्लीलता परोसी जा रही थी, जहां पर्यटकों को शराब के साथ आइटम सॉन्ग पर डांस करवाया जाता था। कालबेलिया समाज ने आरोप लगाया था कि लड़कों को उनकी पारंपरिक ड्रेस पहनाकर यह सब किया जा रहा है, जो उनकी संस्कृति का अपमान है। समाज की नाराजगी के बाद सर्वसम्मति से इसे बंद करने का फैसला लिया गया था। अब AI विज्ञापन ने पुराने घावों को फिर से कुरेद दिया है।
आगे क्या? संस्कृति बचाने की मुहिम
यह घटना AI तकनीक के दुरुपयोग की खतरे की घंटी है। विशेषज्ञों का कहना है कि डीपफेक और AI-जनित कंटेंट से निपटने के लिए सख्त कानूनों की जरूरत है। जैसलमेर के पर्यटन उद्योग से जुड़े लोग चिंतित हैं कि ऐसे विज्ञापनों से पर्यटकों की संख्या प्रभावित हो सकती है। जिला प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि मामले की गहन जांच की जाएगी और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।