थार की बेटियों का कमाल जयपुर आर्मी डे परेड में थार की सुमित्रा और भावना ने रचा इतिहास

बाड़मेर की दो बेटियों ने आर्मी डे परेड में शामिल होकर इतिहास रचा किसान की बेटियों का शानदार सफर।

Jan 25, 2026 - 12:07
थार की बेटियों का कमाल जयपुर आर्मी डे परेड में थार की सुमित्रा और भावना ने रचा इतिहास

बाड़मेर। राजस्थान के रेतीले धोरों और सीमावर्ती जिले बाड़मेर की दो बेटियों ने वह कर दिखाया है जो आज से पहले कभी नहीं हुआ था।15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित ऐतिहासिक 'आमी डे परेड' में हिस्सा लेकर जब एनसीसी कैडेट्स सुमित्रा जोगासर और भावना डबोई अपने गांव पहुंचीं, तो उनका स्वागत किसी नायिका की तरह किया गया। यह पहला मौका था जब थार की बेटियों ने सेना दिवस के राष्ट्रीय मंच पर कदम रखा।

पहली बार जयपुर की सड़कों पर थल सेना दिवस

आमतौर पर सेना दिवस की मुख्य परेड दिल्ली में आयोजित की जाती है,लेकिन इस बार सेना मुख्यालय के बाहर पहली बार जयपुर की सड़कों पर 4 किलोमीटर लंबी भव्य परेड का आयोजन किया गया इस ऐतिहासिक आयोजन की सबसे खास बात यह रही कि इसमें पहली बार एनसीसी गर्ल्स कैडेट्स को भी शामिल होने का मौका मिला बाड़मेर की सुमित्रा और भावना ने इस अवसर को बखूबी भुनाया और रेगिस्तान का नाम रोशन किया।

40 दिनों की कठिन तपस्या और अनुशासन

राष्ट्रीय स्तर की इस परेड में शामिल होना आसान नहीं था दोनों बेटियों ने लगभग 40 दिनों की कड़ी ट्रेनिंग पूरी की इस दौरान उन्होंने न केवल भीषण सर्दी का सामना किया,बल्कि अनुशासन,शारीरिक फिटनेस और आत्मविश्वास का कड़ा अभ्यास भी किया सुबह के शुरुआती घंटों से लेकर देर शाम तक चलने वाले अभ्यास ने उन्हें एक फौजी के जज्बे से भर दिया।

किसान पिता की आँखों में गर्व के आंसू

सुमित्रा और भावना दोनों ही साधारण किसान परिवारों से ताल्लुक रखती हैं सीमावर्ती क्षेत्र और संसाधनों की कमी के बावजूद, इन बेटियों की लगन में कोई कमी नहीं आई अपने अनुभव साझा करते हुए सुमित्रा ने भावुक होकर बताया, "जब मैं परेड कर रही थी, तब सामने खड़े मेरे पिता मुझे देख रहे थे उनके चेहरे पर जो गर्व और खुशी थी, उसने मेरा हौसला दस गुना बढ़ा दिया।

भावना ने कहा कि यह सिर्फ उनकी व्यक्तिगत जीत नहीं है, बल्कि थार की हर उस बेटी की जीत है जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती है।

युवाओं के लिए प्रेरणा बनीं बेटियां

बाड़मेर पीजी कॉलेज के एनसीसी अधिकारी कैप्टन डॉ. आदर्श किशोर जाणी ने इस उपलब्धि को जिले के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है। उन्होंने कहा कि यह सफलता साबित करती है कि क्षेत्र चाहे कितना भी चुनौतीपूर्ण या पिछड़ा क्यों न हो,अगर दिशा सही हो और इच्छाशक्ति मजबूत हो,तो कोई भी लक्ष्य नामुमकिन नहीं है।

गांव में जश्न का माहौल

बेटियों के वापस लौटने पर पूरे बाड़मेर और उनके पैतृक गांवों में उत्सव जैसा माहौल देखा गया ग्रामीणों ने ढोल-धमाकों और मालाओं के साथ बेटियों का स्वागत किया बुजुर्गों ने उन्हें आशीर्वाद दिया और युवाओं ने इसे एक बड़ी प्रेरणा बताया।