हनुमान बेनीवाल: किसान, युवा और आंदोलनों से बनी राजस्थान की जुझारू राजनीति

किसान आंदोलन से अग्निपथ विरोध तक, जानिए हनुमान बेनीवाल के बड़े आंदोलनों और राजनीतिक असर की पूरी कहानी

Jan 13, 2026 - 17:04
हनुमान बेनीवाल: किसान, युवा और आंदोलनों से बनी राजस्थान की जुझारू राजनीति

राजस्थान की राजनीति में हनुमान बेनीवाल एक ऐसे नेता के रूप में पहचाने जाते हैं, जिन्होंने आंदोलन को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। छात्र राजनीति से निकलकर संसद तक पहुंचने वाले बेनीवाल ने हमेशा खुद को किसानों, युवाओं और आम लोगों की आवाज के रूप में प्रस्तुत किया है। उनके आंदोलनों ने न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक बहस को दिशा दी है।

किसान आंदोलन और दिल्ली कूच: राजनीति का बड़ा मोड़

साल 2020-21 का किसान आंदोलन हनुमान बेनीवाल के राजनीतिक जीवन का सबसे अहम पड़ाव माना जाता है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में उन्होंने खुलकर किसानों का साथ दिया। इस आंदोलन के दौरान उन्होंने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए से गठबंधन तोड़कर बड़ा राजनीतिक फैसला लिया। इसके बाद हजारों समर्थकों के साथ राजस्थान-हरियाणा सीमा पर शाहजहाँपुर बॉर्डर पर हफ्तों तक धरना दिया। दिल्ली कूच के जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि वे सत्ता से ज्यादा किसान हित को प्राथमिकता देते हैं।

अग्निपथ योजना के खिलाफ युवाओं की आवाज

साल 2022 में सेना भर्ती की अग्निपथ योजना के विरोध में हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान के युवाओं को एकजुट किया। जून 2022 में जोधपुर महाकैंपस में हुई विशाल रैली में लाखों युवाओं की भागीदारी ने इस आंदोलन को खास बना दिया। बेनीवाल ने इसे “युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़” बताया और सरकार से योजना वापस लेने की मांग की। यह आंदोलन युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।

हुंकार रैलियां: व्यवस्था परिवर्तन का आह्वान

राजस्थान लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के गठन से पहले, 2016 से 2018 के बीच बेनीवाल ने पूरे राज्य में ‘हुंकार रैलियां’ कीं। नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर और जयपुर में आयोजित इन रैलियों का मकसद बजरी खनन माफिया पर कार्रवाई, किसानों की कर्ज माफी और टोल मुक्त राजस्थान की मांग करना था। इन आंदोलनों ने उन्हें एक जुझारू और सड़क से संसद तक संघर्ष करने वाले नेता के रूप में स्थापित किया।

छात्र राजनीति और भर्ती घोटालों पर संघर्ष

हनुमान बेनीवाल की राजनीति में छात्र मुद्दों का खास स्थान रहा है। 2023-24 में राजस्थान सरकार द्वारा छात्र संघ चुनावों पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ उन्होंने जयपुर में बड़ा आंदोलन किया। इसके अलावा, SI भर्ती परीक्षा पेपर लीक जैसे मामलों को लेकर भी वे लगातार सक्रिय रहे। 2025 तक उन्होंने इन मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन कर भर्ती घोटालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

पर्यावरण के लिए जोजरी नदी बचाओ आंदोलन

केवल राजनीतिक ही नहीं, बल्कि पर्यावरणीय मुद्दों पर भी बेनीवाल सक्रिय रहे हैं। जोजरी नदी में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ उन्होंने ‘जोजरी बचाओ आंदोलन’ का नेतृत्व किया। इस आंदोलन के जरिए उन्होंने पर्यावरण संरक्षण और उद्योगों की जवाबदेही का सवाल उठाया।

टोल मुक्त राजस्थान अभियान

बेनीवाल का एक और चर्चित अभियान रहा है टोल मुक्त राजस्थान। उन्होंने राज्य हाईवे पर निजी वाहनों से टोल वसूली के खिलाफ कई बार उग्र प्रदर्शन किए और टोल नाकों पर धरने दिए। इन आंदोलनों के दबाव में राज्य सरकार को कुछ समय के लिए टोल में रियायतें भी देनी पड़ीं।

आंदोलनों का राजनीतिक प्रभाव

हनुमान बेनीवाल के आंदोलनों की सबसे बड़ी खासियत यह रही है कि वे जाट और किसान राजनीति के साथ-साथ युवाओं को भी जोड़ने में सफल रहे। उनकी छवि एक ऐसे नेता की बनी है जो सड़क पर उतरकर संघर्ष करता है और जनमुद्दों को मजबूती से उठाता है। यही वजह है कि वे आज भी राजस्थान की राजनीति में एक प्रभावशाली और चर्चित चेहरा बने हुए हैं।