मिर्धा परिवार में 'समाधि' की जंग: 150 गज जमीन पर खूनी रिश्तों की दरार, FIR दर्ज

मिर्धा परिवार (नागौर-जोधपुर की प्रमुख राजनीतिक-किसान परिवार) में जोधपुर के सूथला स्थित 'मिर्धा फार्म' की 150 वर्ग गज जमीन पर विवाद तेज हो गया है। यह जमीन पैतृक समाधि स्थल (नाथूराम मिर्धा, उनकी मां, रवि मिर्धा आदि की समाधियां) के साथ जुड़ी है।

Jan 15, 2026 - 15:39
मिर्धा परिवार में 'समाधि' की जंग: 150 गज जमीन पर खूनी रिश्तों की दरार, FIR दर्ज

जोधपुर। नागौर की राजनीति के दिग्गज मिर्धा परिवार में अब संपत्ति और पूर्वजों की यादों को लेकर घमासान छिड़ गया है। जोधपुर के सूथला इलाके में स्थित 'मिर्धा फार्म' की 150 वर्ग गज जमीन पर कब्जे की लड़ाई थाने तक पहुंच गई। पूर्व सांसद डॉ. ज्योति मिर्धा ने अपने चचेरे भाई मनीष मिर्धा और उनके साथियों पर हमला, तोड़फोड़ और अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए 14 जनवरी को एफआईआर दर्ज कराई है। दूसरी तरफ, मनीष पक्ष इसे पैतृक समाधि स्थल की रक्षा का संघर्ष बता रहा है। विवाद इतना गहरा है कि पुलिस को समाधि स्थल पर जवान तैनात करने पड़े। आइए जानते हैं इस पारिवारिक कलह की पूरी कहानी...

समाधि स्थल बना विवाद का केंद्र: बेशकीमती जमीन बेचने की साजिश का आरोप

इस पूरे प्रकरण की जड़ फार्म हाउस के अंदर बने 150 वर्ग गज के समाधि स्थल में छिपी है, जो परिवार की भावनाओं से गहराई से जुड़ा हुआ है। मनीष मिर्धा पक्ष का दावा है कि डॉ. ज्योति मिर्धा इस मूल्यवान जमीन को बेचना चाहती हैं, लेकिन बीच में खड़ा पैतृक समाधि स्थल सौदे में रोड़ा बन रहा है। मनीष का आरोप है कि ज्योति समाधि को हटाना चाहती हैं, जबकि वे अपने पूर्वजों की निशानी को बचाने के लिए लड़ रहे हैं।

समाधि स्थल का इतिहास पुराना है। सबसे पहले 1982 में नाथूराम मिर्धा की मां की समाधि यहां बनाई गई थी। फिर 1987 में मनीष के बड़े भाई रवि की समाधि बनी। 1996 में नाथूराम मिर्धा के निधन के बाद उनकी समाधि भी यहीं स्थापित की गई। अब मनीष अपने पिता भानु प्रकाश मिर्धा की समाधि यहीं बनाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसका ज्योति पक्ष विरोध कर रहा है। शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि मनीष ने गुंडों के साथ मिलकर मालिकाना हक वाली जमीन को हड़पने की नीयत से हमला किया है।

चाबियां छीनीं, धमकियां दीं: 13 जनवरी से शुरू हुई जंग की दास्तान

एफआईआर के अनुसार, विवाद की शुरुआत 13 जनवरी को दोपहर करीब 12 बजे हुई। मनीष मिर्धा अपने 10-12 साथियों के साथ जबरन फार्म हाउस में घुस आए। आरोप है कि उन्होंने वहां मौजूद केयरटेकर सलीम को डराकर चाबियां छीन लीं और धमकी दी कि 'निकल जाना, वरना अच्छा नहीं होगा'।अगले दिन यानी 14 जनवरी को आरोपी पक्ष ने दोबारा हमला बोला। उन्होंने ताले तोड़े, समाधि स्थल के साथ छेड़छाड़ की और तोड़फोड़ शुरू कर दी। ज्योति मिर्धा के अधिकृत प्रतिनिधि प्रेमप्रकाश ने पुलिस को बताया कि मनीष और उनके साथी वीडियो फुटेज में स्पष्ट रूप से तोड़फोड़ करते नजर आ रहे हैं। प्रताप नगर थाने में दर्ज रिपोर्ट में अनाधिकृत प्रवेश, तोड़फोड़ और हमले के आरोप लगाए गए हैं।

इजराइल से मंगाए आम के पौधे: नाथूराम मिर्धा का ऐतिहासिक फार्म और उसकी विरासत

यह विवादित संपत्ति दिग्गज किसान नेता स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा की विरासत से जुड़ी है। उन्होंने 1960 में जोधपुर के चौपासनी रोड पर सूथला क्षेत्र में 50 बीघा जमीन खरीदी थी। यहां उन्होंने खेती-बाड़ी के अनोखे प्रयोग किए, जिनमें इजराइल से आयातित आम के पौधे, पिग फार्म और मुर्गी फार्म शामिल थे। इसी फार्म के एक कोने में सबसे पहले उनकी मां की समाधि बनी, जो अब विवाद का केंद्र है।वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, खसरा नंबर 76, 77, 80, 82 और 90 की यह जमीन डॉ. ज्योति मिर्धा और उनकी बहन श्वेता मिर्धा के नाम पर दर्ज है। ज्योति पक्ष इसे अतिक्रमण और अवैध कब्जा बता रहा है, जबकि मनीष पक्ष इसे पूर्वजों की स्मृति की रक्षा का मुद्दा मानता है।

पुलिस की त्वरित कार्रवाई: वीडियो फुटेज से जांच, समाधि पर पहरा

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने फुर्ती दिखाई। प्रताप नगर थाने ने भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मनीष मिर्धा और अन्य के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें संपत्ति में अनाधिकृत प्रवेश, चोट पहुंचाने की तैयारी के साथ जबरन घुसपैठ और गैरकानूनी जमावड़ा कर हमले की धाराएं शामिल हैं। थानाधिकारी भवानी सिंह जांच कर रहे हैं और मौके के वीडियो फुटेज को सबूत के रूप में सुरक्षित किया गया है।