जैसलमेर में सर्दी ने ली जोरदार वापसी: मावठ की झमाझम बारिश और धूल भरी आंधी ने ठिठुराया पूरा जिला

जैसलमेर जिले में विदाई की ओर बढ़ रही सर्दी ने पश्चिमी विक्षोभ के कारण जोरदार वापसी की। गुरुवार को दिन भर धूल भरी आंधी (हवा की गति 15-20 किमी/घंटा) चली, रात में मावठ की झमाझम बारिश हुई

Jan 23, 2026 - 10:14
जैसलमेर में सर्दी ने ली जोरदार वापसी: मावठ की झमाझम बारिश और धूल भरी आंधी ने ठिठुराया पूरा जिला

पश्चिमी विक्षोभ का पलटवार, रातोंरात बदला मौसम का मिजाज

जैसलमेर। विदाई की ओर बढ़ रही सर्दी ने पश्चिमी विक्षोभ के दम पर एक बार फिर जबरदस्त कमबैक किया है। गुरुवार को दिन भर चली तेज धूल भरी आंधी के बाद रात में हुई मावठ की झमाझम बारिश ने पूरे जिले को ठंड की चपेट में ले लिया। शुक्रवार सुबह लोग कड़ाके की सर्दी से जूझते नजर आए, घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया। मौसम विभाग ने रविवार तक कड़ाके की ठंड और शीत लहर का येलो अलर्ट जारी किया है।

धूल से बारिश तक: गुरुवार का दिन रहा उलझन भरा

गुरुवार सुबह से ही जैसलमेर में मौसम ने करवट ली। दिन में हवाओं की औसत गति 15 किमी प्रति घंटा रही, जो शाम होते-होते 18-20 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई। धूल भरी आंधी ने दृश्यता कम कर दी। रात होते ही मौसम ने अचानक रुख बदला – पहले हल्की बूंदाबांदी शुरू हुई, जो जल्द ही तेज झमाझम बारिश में तब्दील हो गई। जैसलमेर शहर के अलावा मोहनगढ़, रामगढ़ और अन्य ग्रामीण इलाकों में भी अच्छी बारिश दर्ज की गई। इस मावठ ने तापमान में तेजी से गिरावट ला दी।बारिश से पहले गुरुवार का अधिकतम तापमान 27.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 11.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ था। लेकिन रात की बारिश के बाद न्यूनतम पारा 3-4 डिग्री और लुढ़कने की संभावना जताई जा रही है।

आगामी 72 घंटे: शीत लहर और कड़ाके की सर्दी का दौर

मौसम विभाग के अनुसार, पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव अभी खत्म नहीं हुआ है। शुक्रवार से रविवार तक जिले में शीत लहर चलने के साथ कड़ाके की ठंड बनी रहेगी। आसमान में बादल छाए रहेंगे और ठंडी हवाएं चलने से दिन के तापमान में भी काफी कमी आएगी। लोगों को गर्म कपड़ों और सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

किसानों के लिए अमृत भी, आफत भी

यह मावठ की बारिश किसानों के लिए दोधारी तलवार साबित हो रही है। एक ओर गेहूं और सरसों की फसलों के लिए यह 'अमृत' मानी जा रही है, क्योंकि नमी से फसलें लहलहाएंगी। वहीं दूसरी ओर 20 किमी प्रति घंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने जीरा, ईसबगोल और सरसों के फूलों को नुकसान पहुंचाने का खतरा बढ़ा दिया है। कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इस नमी और ठंड में फसलों में फफूंद, रोग या कीटों का संक्रमण बढ़ सकता है। इसलिए किसान खेतों की नियमित निगरानी करें और आवश्यक सतर्कता अपनाएं।