आधी रात भाई-बहन का अनोखा रिश्ता: बागेश्वर धाम सरकार पहुंचे राखी बहनों के घर
रामगंज मंडी में आधी रात बागेश्वर धाम सरकार ने निभाया वादा, राखी बहनों के घर पहुंचकर पी चाय
बागेश्वर धाम (मध्यप्रदेश) के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने एक बार फिर अपने व्यवहार और वचनों से लोगों का दिल जीत लिया। रामगंज मंडी में चल रही श्रीराम कथा के दौरान उन्होंने दो बहनों से किया गया वादा निभाते हुए शनिवार देर रात करीब एक बजे उनके घर पहुंचकर चाय पी। यह पल न केवल दोनों बहनों के लिए, बल्कि वहां मौजूद हर व्यक्ति के लिए भावुक कर देने वाला रहा।
श्रीराम कथा से शुरू हुई भावनात्मक कहानी
आचार्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री इन दिनों 23 जनवरी से कोटा जिले के रामगंज मंडी क्षेत्र के रीको औद्योगिक क्षेत्र स्थित फतेहपुर (गुणदी) में श्रीराम कथा का वाचन कर रहे हैं। कथा के पहले ही दिन भावना और खुशबू राठौर नाम की दो बहनों ने व्यास पीठ के सामने आकर आचार्य को राखी बांधने और उन्हें अपना भाई मानने की इच्छा जताई थी। दोनों बहनों ने हाथों में राखी लेकर यह भावनात्मक आग्रह किया, जिसे आचार्य श्री ने सहर्ष स्वीकार कर लिया।
घर आकर चाय पीने का दिया था वचन
राखी बांधते समय ही दोनों बहनों ने आचार्य धीरेंद्र शास्त्री को अपने घर चाय पीने का न्योता दिया था। इस पर आचार्य ने मंच से ही कहा था कि वे रामगंज मंडी में तीन दिन रुकेंगे और बहनों के घर जरूर आएंगे। यह वादा उस समय सैकड़ों श्रद्धालुओं के सामने किया गया था।
क्रिकेट के बाद आधी रात पहुंचे बहनों के घर
शनिवार रात आचार्य धीरेंद्र शास्त्री का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहा। पहले वे शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के कोटा स्थित रंगबाड़ी आवास पहुंचे। इसके बाद बोरखेड़ा इलाके में भक्तों से संवाद किया। रात करीब 12 बजे वे मोड़क स्थित मंगलम सीमेंट फैक्ट्री के ग्राउंड पहुंचे, जहां करीब आधे घंटे तक भक्तों के साथ क्रिकेट खेला और चौके-छक्के लगाए। क्रिकेट के बाद आचार्य शास्त्री सीधे रामगंज मंडी के इंद्रप्रस्थ कॉलोनी स्थित वार्ड नंबर 3 पहुंचे। रात करीब एक बजे जैसे ही वे भावना और खुशबू राठौर के घर पहुंचे, दोनों बहनों की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े।
“आज से हम तुम्हारे भाई हैं”
घर में प्रवेश करते ही आचार्य धीरेंद्र शास्त्री ने दोनों बहनों से आत्मीयता से बात की और खुशबू के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा कि आज से वे उनके भाई हैं और भाई की कमी कभी महसूस नहीं होने देंगे। उन्होंने बताया कि यह वही बहनें हैं, जिन्होंने डाक से बागेश्वर धाम भी राखी भेजी थी और एक बार धाम पहुंचने के बावजूद भारी भीड़ के कारण मिल नहीं पाई थीं।
परिवार की भावुक प्रतिक्रिया
दोनों बहनों के पिता लालचंद राठौर और माता हेमलता राठौर ने बताया कि उनकी बेटियां लंबे समय से इस इच्छा को मन में संजोए हुए थीं। उन्हें खुद विश्वास नहीं होता था कि आचार्य धीरेंद्र शास्त्री सच में उनके घर आएंगे। लेकिन शनिवार की रात यह सपना साकार हो गया। पिता ने कहा कि यह उनके परिवार के लिए आशीर्वाद से कम नहीं है।
बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण
करीब आधे घंटे तक घर में रुकने के दौरान आचार्य शास्त्री ने चाय पी, परिवार का हालचाल जाना और वहां मौजूद लोगों से बातचीत की। विदा होने से पहले उन्होंने भावना और खुशबू को बागेश्वर धाम आने का निमंत्रण दिया और उनके पिता को धाम की ओर से एक कूपन भी भेंट किया। इस दौरान शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर भी उनके साथ मौजूद रहे।
स्नेह और विश्वास का जीवंत उदाहरण
यह मुलाकात केवल एक धार्मिक गुरु और भक्तों की भेंट नहीं थी, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, विश्वास और स्नेह का जीवंत उदाहरण बन गई। आधी रात का यह आत्मीय क्षण रामगंज मंडी में लंबे समय तक याद रखा जाएगा।