कंबोडिया से 1100 करोड़ की महाठगी 2 लाख सिम कार्ड और 5 गिरफ्तार, जोधपुर पुलिस ने ऐसे तोड़ा अंतरराष्ट्रीय साइबर चक्रव्यूह!
जोधपुर पुलिस का बड़ा धमाका! कंबोडिया से चल रहे 1100 करोड़ के साइबर फ्रॉड का पर्दाफाश। जानें कैसे 36,000 भारतीय सिम कार्ड्स के जरिए आपको ठग रहा था ये अंतरराष्ट्रीय गिरोह।
राजस्थान की जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस ने देश के अब तक के सबसे बड़े साइबर फ्रॉड नेटवर्क में से एक का पर्दाफाश किया है। कंबोडिया से संचालित होने वाले इस अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट ने भारतीय सिम कार्ड्स के जरिए करीब 1,100 करोड़ रुपये की ठगी को अंजाम दिया। पुलिस की इस कार्रवाई ने न केवल साइबर अपराधियों के नेटवर्क को हिला कर रख दिया है, बल्कि तकनीकी जांच के एक नए मानक भी स्थापित किए हैं।
कैसे शुरू हुई जांच?
इस पूरे मामले की शुरुआत साइबर ठगी की कुछ शिकायतों से हुई थी। जब जोधपुर पुलिस ने इन मामलों की गहराई से जांच की, तो कड़ियां आपस में जुड़ती गईं। पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण के दौरान लगभग 2.30 लाख मोबाइल सिम कार्ड्स के रिकॉर्ड को खंगाला। इस विशाल डेटा की जांच में जो तथ्य सामने आए, वे चौंकाने वाले थे।
कंबोडिया में एक्टिव थे हजारों भारतीय सिम
जांच में पाया गया कि करीब 36,000 भारतीय सिम कार्ड कंबोडिया में 'इंटरनेशनल रोमिंग' पर एक्टिव थे। इनमें से 5,300 सिम कार्ड्स का सीधा संबंध देशभर में हुई 1,100 करोड़ रुपये की ठगी से पाया गया। अपराधी कंबोडिया के 'प्रीआ सिहानूक' (Preah Sihanouk) इलाके में बैठकर इन भारतीय नंबरों का इस्तेमाल व्हाट्सएप चलाने के लिए करते थे। चूंकि नंबर भारतीय होता था, इसलिए आम लोगों को यह शक नहीं होता था कि मैसेज या कॉल विदेश से आ रहा है। इन नंबरों के जरिए लोगों को नकली निवेश (Fake Investment) और ऑनलाइन ट्रेडिंग के जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये लूटे गए।
सिम कार्ड की तस्करी का अनोखा तरीका
पुलिस ने खुलासा किया कि यह गिरोह बहुत ही शातिराना ढंग से सिम कार्ड्स की तस्करी करता था। गिरोह के सदस्य स्थानीय स्तर पर सिम एजेंटों से मिले हुए थे। जब कोई ग्राहक सिम खरीदने आता, तो उसे एक सिम दे दिया जाता, लेकिन उसके दस्तावेजों पर चुपके से दूसरा सिम भी एक्टिव कर लिया जाता था। ये अतिरिक्त सिम कार्ड भारी मुनाफे पर बेचे जाते थे। भारत से इन सिम कार्ड्स को मलेशियाई नागरिकों के जरिए कंबोडिया भेजा जाता था। पुलिस ने इस मामले में चार मलेशियाई नागरिकों की पहचान की है, जिनके खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी किया गया है।
पांच मुख्य आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस सिंडिकेट की रीढ़ तोड़ने के लिए छापेमारी कर पांच मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में शामिल हैं हेमत पंवार: सिम वितरक (नागौर)रामावतार राठी: सिम बिक्री एजेंट हरीश मलाकार: अजमेर निवासी मोहम्मद शरीफ: जोधपुर निवासी संदीप भट्ट: लुधियाना, पंजाब निवासी ये आरोपी भारत में सिम कार्ड्स का इंतजाम करने और उन्हें सुरक्षित तरीके से बॉर्डर पार पहुंचाने का काम संभालते थे।
किन राज्यों में कितनी हुई ठगी?
इस फ्रॉड सिंडिकेट ने देश के लगभग हर बड़े राज्य को अपना निशाना बनाया। आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र को हुआ है महाराष्ट्र: 248.21 करोड़ रुपये तमिलनाडु: 225.50 करोड़ रुपये दिल्ली: 73.67 करोड़ रुपये तेलंगाना: 73.43 करोड़ रुपये कर्नाटक: 71.79 करोड़ रुपये राजस्थान: 25.71 करोड़ रुपये
पुलिस की अगली कार्रवाई
जोधपुर पुलिस अब करीब 5,000 संदिग्ध सिम कार्ड्स और उनसे जुड़े व्हाट्सएप अकाउंट्स को ब्लॉक करने की प्रक्रिया शुरू कर चुकी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष जांच टीम (SIT) का गठन किया गया है। यह टीम न केवल बचे हुए आरोपियों की तलाश करेगी, बल्कि इस सिंडिकेट के 'मनी ट्रेल' (पैसों के लेनदेन) का भी पता लगाएगी ताकि यह साफ हो सके कि ठगी का पैसा किन बैंक खातों और क्रिप्टोकरेंसी वॉलेट्स में भेजा गया है।