सागवाड़ा में पालिका भवन को लेकर भाजपा में घमासान, चेयरमैन पर लगे गंभीर आरोप
डूंगरपुर के सागवाड़ा में नगरपालिका भवन निर्माण को लेकर भाजपा पार्षदों ने अपने ही चेयरमैन पर निजी स्वार्थ के आरोप लगाए।
राजस्थान के डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा कस्बे में नगरपालिका के नए भवन निर्माण को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। मामला इसलिए ज्यादा चर्चा में है क्योंकि विरोध किसी दूसरी पार्टी से नहीं, बल्कि सत्तारूढ़ भाजपा के पार्षदों और कार्यकर्ताओं की ओर से ही सामने आया है। भाजपा के भीतर उभरे इस विवाद ने स्थानीय राजनीति में हलचल पैदा कर दी है।
शिलान्यास से पहले खुला विरोध
नगरपालिका के नए भवन के शिलान्यास कार्यक्रम से पहले ही भाजपा पार्षदों और कार्यकर्ताओं ने पत्रकार वार्ता कर चेयरमैन आशीष गांधी के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने भवन निर्माण के लिए चुने गए स्थान को लेकर आपत्ति जताई और इसे जल्दबाजी भरा निर्णय बताया। विरोध करने वालों का कहना है कि इस फैसले में जनहित से ज्यादा निजी हित को तरजीह दी जा रही है।
चेयरमैन पर निजी स्वार्थ के आरोप
भाजपा पार्षद हरीश सोमपुरा ने चेयरमैन आशीष गांधी पर गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि नगरपालिका भवन शहर से काफी दूर, करीब 40 बीघा अधिशेष भूमि पर बनाया जा रहा है। आरोप है कि इस स्थान के पास चेयरमैन की खुद की 7 से 8 बीघा जमीन स्थित है। पार्षदों का दावा है कि भवन बनने से आसपास की जमीनों के दाम बढ़ेंगे, जिससे चेयरमैन को सीधा फायदा हो सकता है। इसे उन्होंने जनता के हितों के खिलाफ बताया।
शहर से बाहर भवन बनाने पर सवाल
विरोध कर रहे पार्षदों का कहना है कि नगरपालिका जैसे महत्वपूर्ण कार्यालय को शहर के भीतर या शहर के नजदीक होना चाहिए, ताकि आम लोगों को सुविधा मिल सके। शहर से दूर भवन बनने पर लोगों को दफ्तर तक पहुंचने में परेशानी होगी। उनका आरोप है कि यह फैसला जनसुविधा को नजरअंदाज कर लिया गया है।
पुराना विवाद फिर चर्चा में
इस पूरे मामले में एक पुराना विवाद भी फिर से सामने आ गया है। पार्षदों ने याद दिलाया कि इससे पहले कांग्रेस के तत्कालीन चेयरमैन नरेंद्र खोडनिया ने भी पालिका भवन को शहर से बाहर बनाने का प्रयास किया था। उस समय भाजपा पार्षदों ने इसका कड़ा विरोध किया था, जिसके बाद सरकार ने पद के दुरुपयोग के आरोप में खोडनिया को निलंबित कर दिया था। अब वही कदम भाजपा से जुड़े चेयरमैन द्वारा उठाए जाने का आरोप लगाया जा रहा है।
ज्ञापन के बाद भी नहीं बदला फैसला
भाजपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि प्रस्तावित स्थल को लेकर चार से पांच बार आपत्ति जताई जा चुकी है। मंत्री, एसडीएम, मुख्यमंत्री और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तक ज्ञापन देकर शिलान्यास रोकने की मांग की गई थी। कुछ समय पहले शिलान्यास कार्यक्रम निरस्त भी किया गया था, जिससे उम्मीद जगी थी कि निर्णय पर पुनर्विचार होगा। लेकिन अब एक बार फिर शिलान्यास की तैयारी शुरू हो गई है, जिससे नाराजगी और बढ़ गई है।
पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी का आरोप
विवाद केवल भवन के स्थान तक सीमित नहीं है। कार्यकर्ताओं ने यह आरोप भी लगाया कि पार्टी के पुराने और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी की जा रही है। उनका कहना है कि वर्षों से भाजपा के लिए काम करने वाले लोगों को दरकिनार कर हाल ही में कांग्रेस से आए नेताओं को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इससे पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है।
भविष्य को लेकर चेतावनी
भाजपा कार्यकर्ताओं और पार्षदों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि इस फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो इसका असर आने वाले समय में पार्टी को झेलना पड़ सकता है। उनका कहना है कि जनता के हितों की अनदेखी और कार्यकर्ताओं की उपेक्षा से पार्टी की छवि को नुकसान होगा। सागवाड़ा नगरपालिका भवन को लेकर उठा यह विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह गया है, बल्कि भाजपा की अंदरूनी राजनीति का अहम उदाहरण बनता जा रहा है। अब देखना यह होगा कि पार्टी नेतृत्व इस असंतोष को कैसे संभालता है और क्या इस फैसले में कोई बदलाव होता है या नहीं।