OMR घोटाला: गहलोत के ट्वीट से सियासी भूचाल, सरकारों पर उठे बड़े सवाल

OMR घोटाले पर गहलोत, भजनलाल और वसुंधरा के बीच आरोप-प्रत्यारोप, कार्रवाई पर जनता में बढ़ा अविश्वास

Jan 22, 2026 - 20:41
OMR घोटाला: गहलोत के ट्वीट से सियासी भूचाल, सरकारों पर उठे बड़े सवाल

राजस्थान में OMR शीट घोटाले को लेकर एक बार फिर सियासत तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के एक हालिया ट्वीट ने इस मामले को नए सिरे से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ट्वीट में गहलोत ने SOG की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि यह खेल वर्ष 2018 से पहले, यानी भाजपा सरकार के समय शुरू हुआ और 2026 तक जारी रहा। इस एक बयान ने न केवल भाजपा बल्कि कांग्रेस के भीतर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

गहलोत का ट्वीट और उसके सियासी मायने

अशोक गहलोत के इस बयान को राजनीतिक गलियारों में कई तरह से देखा जा रहा है। एक ओर इसे भाजपा सरकार पर आरोप के रूप में लिया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या गहलोत अप्रत्यक्ष रूप से अपने ही कार्यकाल के दौरान हुए OMR घोटाले को स्वीकार कर रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि यदि यह खेल 2018 से 2026 तक चला, तो कांग्रेस शासन के वर्षों में भी इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

भजनलाल शर्मा का पलटवार

वर्तमान मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पहले ही अशोक गहलोत पर पेपर लीक और OMR शीट बदलने जैसे गंभीर आरोप लगा चुके हैं। उनका कहना है कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान भर्ती परीक्षाओं में बड़े स्तर पर अनियमितताएं हुईं। सरकार की ओर से यह दावा किया जा रहा है कि SOG मामले की गहराई से जांच कर रही है और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।

वसुंधरा राजे की चुप्पी

इस पूरे विवाद में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। गहलोत के बयान में अप्रत्यक्ष रूप से उनका नाम आने के बावजूद अब तक उनकी ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चुप्पी भाजपा के भीतर आंतरिक रणनीति का हिस्सा हो सकती है।

कार्रवाई पर उठते सवाल

जब वर्तमान और पूर्व मुख्यमंत्री एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हों, तब सबसे बड़ा सवाल यही है कि कार्रवाई कहां है। अब तक न तो किसी बड़े अधिकारी या कथित ‘बड़े मगरमच्छ’ की गिरफ्तारी हुई है और न ही कोई ठोस परिणाम सामने आए हैं। ऐसे में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच के दावों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

पंचायती राज चुनाव और सियासत

आगामी महीनों में प्रदेश में पंचायती राज चुनाव प्रस्तावित हैं। ऐसे समय में OMR घोटाले पर तेज होती बयानबाजी को चुनावी रणनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। विपक्ष का आरोप है कि यह सब केवल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है, जबकि सत्ता पक्ष खुद को भ्रष्टाचार पर ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ का समर्थक बता रहा है।

सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा का विरोधाभास

दिलचस्प बात यह है कि सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के मामले में सरकार भर्ती रद्द न करने के लिए लगातार तर्क दे रही है। एक ओर भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख दिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर विवादित भर्ती प्रक्रियाओं को बचाने का प्रयास भी किया जा रहा है। यह विरोधाभास आम जनता के बीच असमंजस पैदा कर रहा है।

जनता के भरोसे की परीक्षा

लगातार सामने आ रहे घोटालों, आरोपों और जवाबी आरोपों के बीच आमजन का शासन-प्रशासन और पूरे तंत्र से भरोसा डगमगाना स्वाभाविक है। लोग जानना चाहते हैं कि क्या सच में दोषियों को सजा मिलेगी या यह मामला भी राजनीतिक शोरगुल में दबकर रह जाएगा। OMR घोटाला अब केवल एक जांच का विषय नहीं, बल्कि प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक विश्वसनीयता की परीक्षा बन चुका है। जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकारें आरोपों से आगे बढ़कर ठोस कार्रवाई करेंगी या फिर यह मामला भी समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा। आने वाले दिनों में SOG की जांच और सरकार की कार्रवाई ही तय करेगी कि भरोसे की यह दरार भर पाएगी या और गहरी होगी।