मन की बात में बाड़मेर के किसान का जिक्र, बाजरे के लड्डू बने पहचान

मन की बात में पीएम मोदी ने बाड़मेर के किसान पनाराम की सराहना की, बाजरे के लड्डू बने मिसाल

Jan 25, 2026 - 22:34
मन की बात में बाड़मेर के किसान का जिक्र, बाजरे के लड्डू बने पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ में इस बार राजस्थान के बाड़मेर जिले के एक किसान की मेहनत और नवाचार की गूंज सुनाई दी। पीएम मोदी ने रामसर क्षेत्र में श्री अन्न यानी मिलेट्स को लेकर हो रहे इनोवेशन का उदाहरण देते हुए किसान पनाराम सारण और उनकी कंपनी की सराहना की।यह जिक्र सिर्फ एक किसान की कहानी नहीं, बल्कि ग्रामीण भारत में बदलती सोच, आत्मनिर्भरता और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का प्रतीक बन गया है।

रामसर में श्री अन्न का इनोवेशन

प्रधानमंत्री मोदी ने ‘मन की बात’ में बताया कि रामसर आर्गेनिक फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड से 900 से अधिक किसान जुड़े हुए हैं। ये किसान मुख्य रूप से बाजरे की खेती करते हैं और उसे प्रोसेस कर बाजरे के लड्डू जैसे उत्पाद तैयार कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि इन लड्डुओं की बाजार में अच्छी मांग है और यह जानकर खुशी होती है कि कई मंदिरों में अब प्रसाद के रूप में केवल मिलेट्स का उपयोग किया जा रहा है।

खडीन गांव के किसान पनाराम बने चर्चा का विषय

किसान पनाराम सारण, जो बाड़मेर जिले की रामसर तहसील के खडीन गांव के निवासी हैं, इस पहल के प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने वर्ष 2023 में बाजरे से जुड़े उत्पाद बनाने का काम शुरू किया था।पीएम मोदी द्वारा ‘मन की बात’ में नाम लिए जाने पर पनाराम ने कहा कि यह उनके जीवन का सबसे गौरवशाली पल है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा उनकी कंपनी का नाम लेना उनके लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है।


इंटरनेशनल मिलेट ईयर से मिली नई दिशा

पनाराम बताते हैं कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा भारत के प्रस्ताव पर वर्ष 2023 को ‘अंतर्राष्ट्रीय बाजरा वर्ष’ घोषित किया गया था। उसी दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से मिलेट्स को अपनाने और प्रमोट करने की अपील की थी।यहीं से उन्हें बाजरे के लड्डू और बिस्कुट बनाने की प्रेरणा मिली। उन्होंने इन उत्पादों की तस्वीरें अमेजन और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर अपलोड कीं, जिससे धीरे-धीरे ऑर्डर आने लगे।

ऑर्डर पर बनते हैं शुद्ध आर्गेनिक प्रोडक्ट

पनाराम बताते हैं कि उनके उत्पाद पूरी तरह आर्गेनिक होते हैं, इसलिए वे स्टॉक में नहीं रखते। जैसे ही ऑर्डर मिलता है, तभी लड्डू और बिस्कुट तैयार किए जाते हैं।बड़े ऑर्डर मिलने पर आसपास के किसानों को भी इस काम से जोड़ा जाता है। हालांकि ऑर्डर नहीं मिलने की स्थिति में काम रुक जाता है, क्योंकि क्षेत्र में साल में केवल एक बार बारिश आधारित खेती होती है।

दिल्ली के सेमिनार से मिली ऑनलाइन पहचान

पनाराम का कहना है कि दिल्ली में एक सेमिनार के दौरान उन्हें ऑनलाइन मार्केटिंग की जानकारी मिली। वहीं आयोजकों ने उनकी ऑनलाइन आईडी बनवाई और कंपनी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी करवाई।इसके बाद उनकी ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ी और बिक्री शुरू हुई। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कई बार ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी होती है, जिससे अच्छे उत्पादकों को नुकसान झेलना पड़ता है।

मंदिरों में प्रसाद बन रहा बाजरे का लड्डू

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में उन मंदिरों की भी सराहना की, जहां प्रसाद के रूप में मिलेट्स का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे किसानों की आय बढ़ेगी और लोगों के स्वास्थ्य में भी सुधार होगा।प्रधानमंत्री ने मिलेट्स को सुपर फूड बताते हुए सर्दियों के मौसम में इसके सेवन पर विशेष जोर दिया।

ग्रामीण नवाचार की प्रेरक कहानी

बाड़मेर के किसान पनाराम सारण की यह कहानी बताती है कि अगर सही दिशा, शुद्ध सोच और मेहनत हो तो सीमावर्ती क्षेत्रों से भी देशभर में पहचान बनाई जा सकती है।‘मन की बात’ में मिला यह उल्लेख न केवल पनाराम, बल्कि हजारों किसानों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आया है।