भ्रष्टाचार पर भजनलाल सरकार का बड़ा एक्शन, 24 अफसरों पर गिरी गाज
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सख्त कार्रवाई, भ्रष्ट व अनुशासनहीन अधिकारियों पर अभियोजन, जांच और पेंशन रोक।
राजस्थान सरकार ने भ्रष्टाचार और अनुशासनहीनता के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि सुशासन के रास्ते में किसी भी तरह की लापरवाही या अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने अभियोजन स्वीकृति, धारा 17-ए, अनिवार्य सेवानिवृत्ति और विभागीय जांच से जुड़े कुल 24 प्रकरणों का निस्तारण करते हुए दोषी लोक सेवकों के खिलाफ कठोर कदम उठाए हैं।
सुशासन की दिशा में सरकार का स्पष्ट संदेश
राज्य सरकार का कहना है कि उसका लक्ष्य आमजन को संवेदनशील, पारदर्शी और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन देना है। इसी उद्देश्य के तहत मुख्यमंत्री ने उन मामलों पर त्वरित निर्णय लिया है, जिनमें सरकारी पद और शक्तियों के दुरुपयोग की शिकायतें सामने आई थीं। सरकार के इस कदम को प्रशासनिक सुधार और जवाबदेही की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भ्रष्टाचार के मामलों में अभियोजन स्वीकृति
मुख्यमंत्री ने दो अलग-अलग प्रकरणों में वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी और उद्योग विभाग के वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 19 के तहत अभियोजन स्वीकृति जारी की है। इन पर पद का दुरुपयोग कर अनैतिक लाभ लेने के आरोप हैं। इसके अलावा सार्वजनिक निर्माण विभाग के तीन अधिकारियों पर संवेदक के साथ मिलीभगत कर सड़क निर्माण कार्य में अवैध लाभ पहुंचाने के आरोप सिद्ध होने पर उनके विरुद्ध धारा 13(1)(डी) और धारा 13(2) के तहत अभियोजन स्वीकृति दी गई है।
धारा 17-ए के तहत जांच को मंजूरी
एक गंभीर मामले में कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर राजकीय भूमि को निजी व्यक्ति के नाम खातेदारी देने की शिकायत सामने आई। इस पर राजस्थान प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त अधिकारी के खिलाफ धारा 17-ए के तहत विस्तृत जांच के लिए पूर्वानुमोदन प्रदान किया गया है। सरकार का मानना है कि ऐसे मामलों में गहन जांच से ही सच्चाई सामने आ सकती है।
नियमों के उल्लंघन पर कड़ी शास्ति
राजस्थान सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1958 के तहत चल रहे वृहद शास्ति के मामलों में चार अधिकारियों को नियमों के विरुद्ध कार्य करने पर दंडित किया गया है। इन अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने का आदेश दिया गया है, ताकि भविष्य में ऐसे कृत्यों पर रोक लगाई जा सके।
सेवानिवृत्त अधिकारियों पर भी कार्रवाई
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि सेवानिवृत्ति के बाद भी गलत कार्यों से जुड़े अधिकारी कार्रवाई से नहीं बचेंगे। पांच सेवानिवृत्त अधिकारियों के खिलाफ चल रही जांच में पेंशन रोके जाने की शास्ति लगाई गई है। इनमें से दो मामलों में गंभीर आर्थिक नुकसान और अवैध गतिविधियों में संलिप्तता के चलते शत-प्रतिशत पेंशन रोकने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा चार अन्य मामलों में प्रमाणित आरोपों की जांच रिपोर्ट को मंजूरी देते हुए प्रस्ताव माननीय राज्यपाल को भेजे गए हैं।
अपील और पुनरावलोकन याचिकाओं पर निर्णय
सीसीए नियम-16 के तहत दायर पुनरावलोकन याचिकाओं में से चार याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है। वहीं, अनिवार्य सेवानिवृत्ति से जुड़े एक मामले में अपील अस्वीकार करते हुए पूर्व निर्णय को बरकरार रखा गया है।
प्रशासन में अनुशासन का संदेश
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की इस कार्रवाई को प्रशासनिक सख्ती और अनुशासन का स्पष्ट संदेश माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ यह अभियान आगे भी जारी रहेगा, ताकि जनता का भरोसा मजबूत हो और शासन व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे