रीट परीक्षा में हिजाब पर क्यों मचा बवाल? बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया ड्रेस कोड का 'सीक्रेट'

राजस्थान REET परीक्षा में हिजाब विवाद पर RSSB अध्यक्ष आलोक राज का बड़ा बयान। जानें क्यों परीक्षा में गर्दन के ऊपर का हिस्सा ढका होना मना है और क्या हैं नए नियम।

Jan 21, 2026 - 18:50
रीट परीक्षा में हिजाब पर क्यों मचा बवाल? बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया ड्रेस कोड का 'सीक्रेट'

राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान ड्रेस कोड को लेकर अक्सर विवाद की खबरें सामने आती रहती हैं। हाल ही में कोटा में रीट (REET) भर्ती परीक्षा के दौरान एक छात्रा को हिजाब पहनने की वजह से परीक्षा देने से रोकने का मामला गरमाया हुआ है। इस विवाद के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि बोर्ड का ड्रेस कोड किसी धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने के लिए नहीं, बल्कि परीक्षा की शुचिता और सुरक्षा बनाए रखने के लिए बनाया गया है।

क्या है पूरा मामला?

बीती 18 जनवरी को कोटा के महावीर नगर स्थित तिलक स्कूल परीक्षा केंद्र पर रीट मेन्स लेवल-2 की परीक्षा आयोजित की गई थी। यहाँ बूंदी की रहने वाली अलीशा नाम की एक छात्रा हिजाब पहनकर परीक्षा देने पहुँची थी। केंद्र पर मौजूद अधिकारियों ने ड्रेस कोड का हवाला देते हुए छात्रा को हिजाब उतारकर परीक्षा देने को कहा। छात्रा ने हिजाब हटाने से इनकार कर दिया और बिना परीक्षा दिए ही केंद्र से वापस लौट गई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद नियमों को लेकर बहस छिड़ गई।

ड्रेस कोड के पीछे का मुख्य कारण

बोर्ड अध्यक्ष आलोक राज ने बताया कि ड्रेस कोड का एकमात्र उद्देश्य परीक्षा में किसी भी तरह की नकल या अनुचित साधनों को रोकना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड का ध्यान मुख्य रूप से पाँच चीजों को रोकने पर रहता है ब्लूटूथ डिवाइस,मोबाइल फोन,कैलकुलेटर,हिडन कैमरा,हथियार (जिससे किसी को डराया या नुकसान पहुँचाया जा सके)। आलोक राज ने कहा, "हम चाहते हैं कि जो भी परीक्षार्थी परीक्षा कक्ष में बैठे, उसकी गर्दन के ऊपर का हिस्सा साफ दिखना चाहिए। हिजाब या सिर पर लपेटी गई शॉल की वजह से यह जांचना मुश्किल हो जाता है कि कहीं कानों या बालों में कोई छोटा ब्लूटूथ डिवाइस तो नहीं छिपा है। इसी सुरक्षा चिंताओं की वजह से हिजाब और सिर ढंकने वाली अन्य चीजों की अनुमति नहीं दी जाती है।"

दुपट्टे और शॉल पर क्या है नियम?

नियमों की बारीकियों को समझाते हुए उन्होंने कहा कि महिला अभ्यर्थियों के लिए 'चुन्नी' या दुपट्टे पर रोक नहीं है। बोर्ड समझता है कि कई महिलाएं दुपट्टे के बिना असहज महसूस करती हैं। हालांकि, निर्देश यह हैं कि दुपट्टा गले में लिपटा होना चाहिए और वह सिर के नीचे हो, ताकि चेहरा और कान स्पष्ट दिखाई दें। शॉल के साथ भी यही समस्या है कि उसमें इलेक्ट्रॉनिक उपकरण छिपाना आसान होता है, इसलिए उसे भी प्रतिबंधित श्रेणी में रखा गया है।

"अति उत्साह" में न आएं परीक्षा केंद्र के कर्मचारी

बोर्ड अध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि कई बार परीक्षा केंद्रों पर तैनात कर्मचारी 'अति उत्साह' में नियमों को जरूरत से ज्यादा कठोरता से लागू कर देते हैं। उन्होंने केंद्र अधीक्षकों और कार्मिकों से अपील की है कि वे नियमों के मुताबिक ही जांच करें। उन्होंने सुझाव दिया कि अगर किसी अभ्यर्थी के पहनावे पर संदेह है, तो उसकी सघन तलाशी ली जाए जरूरत पड़ने पर अभ्यर्थी से शपथ पत्र (Affidavit) लेकर उसे परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जा सकती है नियमों का पालन इस तरह हो कि अभ्यर्थी का समय खराब न हो और परीक्षा की मर्यादा भी बनी रहे।

पारदर्शिता के लिए उठाए कदम

आलोक राज ने कहा कि ड्रेस कोड की पूरी सूची हर परीक्षा केंद्र को भेजी जाती है और इसे अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड पर भी विस्तार से छापा जाता है ताकि कोई भ्रम न रहे। उन्होंने यह भी दावा किया कि अब तक उनके संज्ञान में ऐसा कोई मामला नहीं आया है जहाँ सिर्फ ड्रेस कोड की वजह से किसी योग्य उम्मीदवार को परीक्षा से वंचित किया गया हो, बशर्ते वह जांच में सहयोग करने को तैयार हो