RSSB अध्यक्ष आलोक राज का बड़ा बयान: अब रीट ही नहीं, आगे की भर्तियों में भी होंगे कठिन पेपर

RSSB अध्यक्ष आलोक राज ने कहा कि अब रटे सवाल नहीं, लॉजिकल और कठिन पेपर होंगे। रीट से शुरू हुआ नया पैटर्न।

Jan 21, 2026 - 15:58
RSSB अध्यक्ष आलोक राज का बड़ा बयान: अब रीट ही नहीं, आगे की भर्तियों में भी होंगे कठिन पेपर

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) अब भर्ती परीक्षाओं के स्तर और पैटर्न में बड़ा बदलाव करने जा रहा है। बोर्ड के अध्यक्ष मेजर जनरल आलोक राज ने साफ शब्दों में कहा है कि अब सिर्फ रीट ही नहीं, बल्कि आने वाली सभी परीक्षाओं में कठिन और सोचने वाले सवाल पूछे जाएंगे। उनका कहना है कि यह बदलाव अभ्यर्थियों की फीडबैक को ध्यान में रखते हुए किया गया है।

पटवारी परीक्षा से मिली सीख

NDTV से खास बातचीत में आलोक राज ने बताया कि पटवारी भर्ती परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने बोर्ड को फीडबैक दिया था। कई अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा का स्तर बहुत आसान था और अच्छे व कमजोर अभ्यर्थियों में अंतर नहीं हो पाया। इसी को लेकर उन्होंने कहा कि ऐसा लगा मानो “गधे और घोड़े एक कर दिए गए हों।” इसी अनुभव के बाद बोर्ड ने परीक्षा प्रणाली में सुधार का निर्णय लिया।

रटे-रटाए सवालों से दूरी

RSSB अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि अब परीक्षाओं में रटे हुए सवालों को प्राथमिकता नहीं दी जाएगी। भविष्य में ऐसे प्रश्न पूछे जाएंगे, जिनमें अभ्यर्थियों को तर्क, समझ और दिमाग का उपयोग करना पड़े। उनका कहना है कि बोर्ड का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान जांचना नहीं, बल्कि अभ्यर्थी की वास्तविक समझ और विश्लेषण क्षमता को परखना है।

रीट परीक्षा में बढ़ाया गया स्तर

आलोक राज ने बताया कि इसी नई सोच के तहत रीट भर्ती परीक्षा में सवालों का स्तर बढ़ाया गया है। जो अभ्यर्थी अच्छी और गंभीर तैयारी के साथ परीक्षा में बैठे, उन्हें पेपर आसान लगा। वहीं जिनकी तैयारी कमजोर थी, उनकी ओर से आपत्तियां सामने आईं। उन्होंने कहा कि आगे आने वाली सभी परीक्षाओं में भी इसी तरह का पैटर्न अपनाया जाएगा।

OMR घोटाले के आरोपों पर जवाब

चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा में OMR शीट बदले जाने के आरोपों पर भी RSSB अध्यक्ष ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और कुछ मंचों पर यह कहा जा रहा है कि करीब 10 हजार OMR बदली गईं, जबकि ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है। उन्होंने साफ कहा कि सबको बोलने की आजादी है, लेकिन बोर्ड ने पूरी पारदर्शिता के साथ परीक्षा करवाई है।

परिणामों में पूरी पारदर्शिता

आलोक राज ने बताया कि इस बार परीक्षा परिणाम जारी करते समय पूरी जानकारी सार्वजनिक की गई है। परिणाम सूची में अभ्यर्थी का नाम, पिता का नाम और प्राप्तांक तक दिए गए हैं। इसका मकसद केवल पारदर्शिता बनाए रखना है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि यदि कोई 10 हजार की बात कर रहा है, तो कम से कम 10 पुख्ता मामले सामने लाकर दिखाए।

नॉर्मलाइजेशन पर स्पष्ट रुख

नॉर्मलाइजेशन को लेकर उठ रहे सवालों पर भी RSSB अध्यक्ष ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि नॉर्मलाइजेशन एक तय और वैज्ञानिक फार्मूले के आधार पर किया गया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हर शिफ्ट से लगभग समान संख्या में अभ्यर्थियों का चयन हो।

सभी शिफ्टों को समान अवसर

उन्होंने कहा कि हर शिफ्ट से करीब 6 हजार अभ्यर्थियों को चयन की प्रक्रिया में शामिल किया गया। सभी शिफ्टों के अभ्यर्थियों को मिलाकर एक कॉमन मेरिट लिस्ट बनाई गई। इसके तहत हर शिफ्ट के टॉप 9 हजार अभ्यर्थियों को चयन का अवसर मिला और सभी वर्गों को तय नियमों के अनुसार प्राथमिकता दी गई।

आगे क्या संदेश?

RSSB अध्यक्ष के इस बयान से साफ है कि आने वाले समय में राजस्थान की भर्ती परीक्षाएं पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण होंगी। अब केवल याद किए गए सवालों से सफलता नहीं मिलेगी, बल्कि समझ, अभ्यास और तार्किक सोच ही चयन की कुंजी बनेगी।