महाराणा प्रताप बयान विवाद: राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने वीडियो जारी कर मांगी माफी
महाराणा प्रताप पर बयान से उठा विवाद बढ़ा, विरोध और आंदोलन की चेतावनी के बीच राज्यपाल कटारिया ने मांगी सार्वजनिक माफी।
पंजाब के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया के एक बयान को लेकर उपजा विवाद अब नए मोड़ पर पहुंच गया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान महाराणा प्रताप को लेकर दिए गए उनके कथित बयान से क्षत्रिय समाज और श्री राजपूत करणी सेना में नाराजगी फैल गई। बयान सामने आने के बाद उदयपुर समेत पूरे मेवाड़ अंचल में तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। देखते ही देखते मामला विरोध प्रदर्शन और आंदोलन की चेतावनी तक पहुंच गया।
मेवाड़ में दिखा जबरदस्त विरोध
राज्यपाल कटारिया के बयान को महाराणा प्रताप के सम्मान के खिलाफ बताते हुए क्षत्रिय समाज के विभिन्न संगठनों ने कड़ा ऐतराज जताया। उदयपुर, राजसमंद और आसपास के क्षेत्रों में विरोध तेज हो गया। श्री राजपूत करणी सेना और अन्य सामाजिक संगठनों ने इसे महापुरुष के अपमान से जोड़ते हुए सार्वजनिक माफी की मांग की। कई जगह ज्ञापन सौंपे गए और आंदोलन की चेतावनी भी दी गई।
आंदोलन की चेतावनी से बढ़ी चिंता
विवाद बढ़ने के साथ ही करणी सेना और क्षत्रिय समाज के नेताओं ने स्पष्ट कहा कि यदि राज्यपाल की ओर से माफी नहीं मांगी गई, तो बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा। इस चेतावनी के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई। सोशल मीडिया पर भी बयान को लेकर तीखी बहस देखने को मिली, जिससे मामला और संवेदनशील हो गया।
वीडियो संदेश जारी कर दी सफाई
लगातार बढ़ते विरोध और नाराजगी के बीच राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने एक वीडियो संदेश जारी किया। वीडियो में उन्होंने पूरे मामले पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि उनके बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य किसी भी समाज, व्यक्ति या महापुरुष की भावनाओं को ठेस पहुंचाना नहीं था।
महाराणा प्रताप के प्रति सम्मान जताया
वीडियो संदेश में राज्यपाल कटारिया ने महाराणा प्रताप के प्रति अपना सम्मान भी व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप देश के महान योद्धा और स्वाभिमान के प्रतीक हैं, जिनका वे हमेशा आदर करते रहे हैं। कटारिया ने कहा कि वे स्वयं भी मेवाड़ की धरती से जुड़े रहे हैं और वहां की परंपराओं और गौरव को भली-भांति समझते हैं।
संदर्भ समझने की अपील
राज्यपाल ने उन सभी लोगों से अपील की, जो उनके बयान से आहत हुए हैं, कि वे पूरा भाषण सुनें और उसके संदर्भ को समझें। उन्होंने कहा कि किसी भी बयान को उसके पूरे संदर्भ में देखना जरूरी होता है। कटारिया ने यह भी कहा कि यदि किसी को उनके शब्दों से ठेस पहुंची है, तो इसके लिए वे खेद प्रकट करते हैं।
सार्वजनिक रूप से माफी
वीडियो संदेश के अंत में राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि वे किसी भी समाज की भावनाओं को आहत करने के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका बयान किसी प्रकार के अपमान की भावना से नहीं दिया गया था। उनकी इस माफी के बाद माना जा रहा है कि विवाद की तीव्रता अब कुछ हद तक कम हो सकती है।
आगे की स्थिति पर नजर
हालांकि राज्यपाल की माफी के बाद भी क्षत्रिय समाज और करणी सेना की अगली रणनीति पर सबकी नजर बनी हुई है। संगठन अब वीडियो संदेश और माफी के बाद आगे के कदमों पर विचार कर रहे हैं। फिलहाल प्रशासन और राजनीतिक हलकों में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सतर्कता बनी हुई है।