बाड़मेर सीमा पर झोलाछाप डॉक्टरों का 'डेथ ट्रैप',चारपाई पर चल रहा मौत का खेल!

बाड़मेर के सरहदी गांवों में बिना डिग्री वाले फर्जी डॉक्टरों का आतंक। सरकारी सिस्टम की सुस्ती और मजबूरी में दांव पर लगी ग्रामीणों की जान। पढ़ें पूरी ग्राउंड रिपोर्ट।

Feb 19, 2026 - 18:59
बाड़मेर सीमा पर झोलाछाप डॉक्टरों का 'डेथ ट्रैप',चारपाई पर चल रहा मौत का खेल!

बाड़मेर - राजस्थान के सीमावर्ती बाड़मेर जिले के ग्रामीण इलाकों में इन दिनों स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर एक खतरनाक खेल खेला जा रहा है बामणोर,भूणिया और गडरा रोड जैसे दूर-दराज के क्षेत्रों में झोलाछाप डॉक्टर और अवैध क्लीनिक कुकुरमुत्ते की तरह फैल गए हैं आलम यह है कि छोटी-छोटी दुकानों और मेडिकल स्टोर के पीछे चारपाइयां बिछाकर बिना किसी डिग्री या लाइसेंस के मरीजों को इंजेक्शन और ड्रिप चढ़ाई जा रही है हैरानी की बात यह है कि जिले में जहां आधिकारिक तौर पर सिर्फ 71 निजी अस्पताल रजिस्टर्ड हैं,वहीं अवैध रूप से चल रहे क्लीनिकों की संख्या सैकड़ों में बताई जा रही है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल इलाज नहीं,बल्कि उनके जीवन के साथ सीधा खिलवाड़ है कई बार गलत दवा या गलत तरीके से इंजेक्शन लगाने के कारण मरीजों की जान पर बन आती है,लेकिन मजबूरी ऐसी है कि पास में कोई सरकारी अस्पताल न होने के कारण लोग इन्हीं फर्जी डॉक्टरों की शरण में जाने को मजबूर हैं।

प्रशासनिक सुस्ती और संसाधनों का अभाव आखिर कार्रवाई क्यों नहीं होती?

बाड़मेर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. विष्णु राम बिश्नोई का मानना है कि विभाग अपनी ओर से कोशिशें तो करता है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही चुनौतियां पेश करती है उनके अनुसार,किसी भी अवैध क्लीनिक पर प्रभावी कार्रवाई करने के लिए चिकित्सा विभाग को पुलिस प्रशासन और जिला औषधि नियंत्रण अधिकारी के साथ की जरूरत होती है वर्तमान में औषधि नियंत्रण अधिकारी के पास अन्य जिलों का भी प्रभार होने के कारण समय पर छापेमारी नहीं हो पाती और इसी देरी का फायदा उठाकर झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकानें चमका रहे हैं।

हालांकि,हाल ही में स्वास्थ्य विभाग ने गडरा रोड क्षेत्र के सामीर का पार गांव में एक अवैध क्लीनिक को सीज किया था, जहां बिना किसी लाइसेंस के प्रैक्टिस की जा रही थी लेकिन इस तरह की छिटपुट कार्रवाइयों से समस्या का स्थाई समाधान नहीं निकल पा रहा है जैसे ही टीम एक जगह कार्रवाई करती है दूसरी जगह नए नाम से ऐसी अवैध दुकानें खुल जाती हैं।

जागरूकता की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं का संकट

इस पूरी समस्या की सबसे बड़ी जड़ ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का अभाव है सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों के पास जब कोई विकल्प नहीं होता,तो वे पास की ही किसी छोटी दुकान या मेडिकल स्टोर पर चले जाते हैं ये झोलाछाप डॉक्टर न केवल मरीजों को लुभाते हैं,बल्कि उन्हें यह भरोसा दिलाते हैं कि वे कम खर्च में तुरंत आराम दिला देंगे।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक गांव-गांव तक बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं पहुंचेंगी और झोलाछापों के खिलाफ पुलिस-प्रशासन मिलकर सख्त अभियान नहीं चलाएगा,तब तक मासूम लोगों की जान दांव पर लगी रहेगी ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासन केवल छापेमारी तक सीमित न रहे,बल्कि इन अवैध क्लीनिकों को जड़ से खत्म करने के लिए निरंतर निगरानी और सख्त सजा का प्रावधान करे ताकि फिर कोई फर्जी डॉक्टर किसी की जान से न खेल सके।