जैन धर्म जीवन जीने की कला, लाडनूं में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बड़ा संदेश
लाडनूं दौरे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने जैन धर्म को जीवन जीने की कला बताया, सुधर्मा सभा का लोकार्पण किया
लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में आयोजित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा में जीने की एक पूर्ण कला है। इसके सिद्धांत आज के आधुनिक और भौतिकवादी दौर में भी उतने ही प्रासंगिक हैं, जितने प्राचीन काल में थे। इस दौरान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने लाडनूं में आयोजित ग्राम उत्थान शिविर का निरीक्षण कर जनसभा को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने डीडवाना-कुचामन जिले को लगभग 529 करोड़ रुपये के 71 विकास कार्यों की सौगात दी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत, मुनि और महंत समाज को सही मार्ग दिखाने का कार्य करते हैं। वे हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को न केवल संजोते हैं, बल्कि उसे आने वाली पीढ़ी तक भी पहुंचाते हैं। राज्य सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि राजस्थान की संस्कृति और परंपराओं को सुरक्षित रखते हुए उन्हें आधुनिक समय के अनुरूप आगे बढ़ाया जाए।
श्री शर्मा ने कहा कि पूज्य आचार्यश्री महाश्रमणजी का राजस्थान आगमन राज्य के लिए सम्मान और गर्व की बात है। उनका संपूर्ण जीवन मानव कल्याण, संयम और त्याग का प्रेरणादायक उदाहरण है। उनकी साधना और विचार लाखों लोगों के जीवन को सकारात्मक दिशा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि आचार्यश्री की शिक्षाएं सरल, व्यावहारिक और हर वर्ग के लिए उपयोगी हैं।
मुख्यमंत्री ने जैन धर्म के अहिंसा सिद्धांत को आज की वैश्विक चुनौतियों से जोड़ा। उन्होंने कहा कि ‘जियो और जीने दो’ का संदेश पर्यावरण संरक्षण की मूल भावना है। आज जब दुनिया जलवायु परिवर्तन जैसी समस्याओं से जूझ रही है, तब जैन दर्शन संयम, सादगी और संतुलन का मार्ग दिखाता है। प्रकृति के साथ सामंजस्य बनाकर चलने की सीख जैन धर्म की बड़ी विशेषता रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती ने धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। यहां विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की भी शिक्षा दी जाती है। यह संस्थान देश ही नहीं, विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन का प्रतिनिधित्व कर रहा है। नवनिर्मित सुधर्मा सभा आने वाले समय में नैतिक शिक्षा और मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगी।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने आचार्यश्री महाश्रमणजी से आशीर्वचन प्राप्त किए और सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर जैन मुनि-साध्वी, जैन विश्व भारती के पदाधिकारी, बुद्धिजीवी और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।