खेजड़ी बचेगी तो थार बचेगा: बीकानेर के खेजड़ी बचाओ आंदोलन को हरीश चौधरी का समर्थन

बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन को हरीश चौधरी का समर्थन, बोले- खेजड़ी ही थार के अस्तित्व की असली पहचान

Feb 10, 2026 - 18:55
खेजड़ी बचेगी तो थार बचेगा: बीकानेर के खेजड़ी बचाओ आंदोलन को हरीश चौधरी का समर्थन

बीकानेर में चल रहे ऐतिहासिक खेजड़ी बचाओ आंदोलन एक बार फिर उफनता नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री से बेनतीजा वार्ता के बाद भी बीकानेर में महापड़ाव जारी है। आज इस महापड़ाव में शामिल होने के लिए AICC मध्यप्रदेश प्रभारी, पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं बायतु विधायक हरीश चौधरी आंदोलन स्थल पर पहुंचे। उन्होंने आंदोलनकारियों को संबोधित करते हुए खेजड़ी संरक्षण को सीधे थार के अस्तित्व से जोड़ा और कहा कि “खेजड़ी बचेगी तो थार बचेगा, थार बचेगा तो हम बचेंगे।”

अपने संबोधन में हरीश चौधरी ने कहा कि खेजड़ी केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि थार की जीवनरेखा है। उन्होंने भावनात्मक शब्दों में कहा कि इस धरती पर सबसे पहले खेजड़ी आई और हम बाद में आए। यदि हमें अपना अस्तित्व बचाना है, तो खेजड़ी को बचाना ही होगा। उन्होंने खेजड़ी को थार की आस्था, संस्कृति और पर्यावरण का आधार बताया।

हरीश चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष किसी राजनीतिक दल का नहीं है, बल्कि पूरे थार क्षेत्र की अस्मिता से जुड़ा हुआ है। उन्होंने कहा कि हर थारवासी को इस आंदोलन में भागीदारी करनी चाहिए, क्योंकि यह लड़ाई आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की है। उन्होंने यह भी कहा कि वे बीकानेर किसी राजनीति के लिए नहीं, बल्कि अपने समाज और थार के अस्तित्व को बचाने के लिए आए हैं।

हरीश चौधरी ने चेतावनी दी कि यदि खेजड़ी का संरक्षण नहीं किया गया, तो थार का पर्यावरण संतुलन गंभीर रूप से बिगड़ जाएगा। इससे पशुधन संकट में आएगा, खेती प्रभावित होगी और रेगिस्तान की पारंपरिक जीवन प्रणाली कमजोर हो जाएगी। उन्होंने सरकार से खेजड़ी संरक्षण को लेकर ठोस और कठोर नियम बनाने की मांग की।

उन्होंने कहा कि खेजड़ी की अंधाधुंध कटाई पर पूर्ण रोक लगनी चाहिए और इसके लिए विशेष कानूनी प्रावधान लागू किए जाने चाहिए। यह केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि थार की सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक पहचान का सवाल है। हरीश चौधरी ने आमरण अनशन पर बैठे संतों, महिलाओं और युवाओं के साहस को नमन किया। उन्होंने कहा कि जो लोग प्रकृति और जीवनदायी वृक्षों की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वे वास्तव में आने वाली पीढ़ियों के लिए लड़ रहे हैं।

उन्होंने प्रदेश सरकार से संवेदनशीलता दिखाने, आंदोलनकारियों से संवाद स्थापित करने और सकारात्मक समाधान निकालने की अपील की। अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि यह आंदोलन तब तक जारी रहना चाहिए, जब तक खेजड़ी को पूर्ण संरक्षण का दर्जा नहीं मिल जाता।