CM से मिलकर लौट रहे स्वामी रामानंद महाराज की कार पलटी, नीलगाय बचाने में हुआ हादसा
खेजड़ी संरक्षण को लेकर CM से मुलाकात के बाद लौट रहे स्वामी रामानंद महाराज की कार हादसे का शिकार हुई
मुकाम मठ के पीठाधीश्वर स्वामी रामानंद महाराज रविवार देर रात एक सड़क हादसे में घायल हो गए। वे जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मुलाकात के बाद बीकानेर लौट रहे थे। जसरासर–कातर सड़क मार्ग पर उनकी कार अचानक अनियंत्रित होकर पलट गई। बताया जा रहा है कि सामने आई नीलगाय को बचाने के प्रयास में यह हादसा हुआ। गनीमत रही कि स्वामी रामानंद महाराज को केवल मामूली चोटें आईं और वे सुरक्षित हैं।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार रात के समय सड़क पर अचानक नीलगाय आ गई। वाहन चालक ने उसे बचाने की कोशिश की, इसी दौरान कार संतुलन खो बैठी और पलट गई। हादसे की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीण और जनप्रतिनिधि मौके पर पहुंचे। बंधाला सरपंच बस्तीराम सहित स्थानीय लोगों ने तुरंत स्वामी रामानंद महाराज को गाड़ी से बाहर निकाला।
हादसे के बाद स्वामी रामानंद महाराज को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। हल्की चोटें होने के कारण इलाज के बाद उन्हें मठ भेज दिया गया। फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है। हादसे की खबर मिलते ही उनके अनुयायियों और समर्थकों में चिंता का माहौल बन गया, हालांकि राहत की बात यह रही कि संत पूरी तरह सुरक्षित हैं।
हादसे से कुछ घंटे पहले ही स्वामी रामानंद महाराज संतों के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ जयपुर में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से मिले थे। इस बैठक में खेजड़ी वृक्ष की कटाई रोकने और इसके संरक्षण के लिए कठोर कानून बनाने की मांग रखी गई थी। संतों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि खेजड़ी संरक्षण को लेकर विधानसभा में जल्द कानून लाया जाए। इस बातचीत को सकारात्मक माना जा रहा था।
खेजड़ी बचाने की मांग को लेकर बीकानेर में पिछले आठ दिनों से बिश्नोई धर्मशाला के सामने महापड़ाव चल रहा है। इसमें प्रदेशभर से बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पर्यावरण प्रेमी शामिल हो रहे हैं। आंदोलनकारियों का कहना है कि खेजड़ी राजस्थान की जीवनरेखा है और इसके बिना पर्यावरण संतुलन संभव नहीं है।
संघर्ष समिति ने सरकार को चेतावनी दी है कि यदि मांगों पर जल्द निर्णय नहीं हुआ तो 17 फरवरी को मुकाम मेले के दौरान बीकानेर में लगभग पांच लाख लोग सामूहिक अनशन करेंगे। समिति का कहना है कि मुकाम मेले में आने वाले श्रद्धालुओं से आंदोलन में शामिल होने की अपील की जाएगी। फाल्गुन महीने में लगने वाले इस मेले में देशभर से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं, जिससे आंदोलन के और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।