लोकसभा में हनुमान बेनीवाल का हमला, राजस्थान की अनदेखी और बेरोजगारी पर घेरा केंद्र
लोकसभा में सांसद हनुमान बेनीवाल ने बजट पर बोलते हुए राजस्थान, महंगाई, बेरोजगारी और जल विवाद के मुद्दे उठाए
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने मंगलवार को लोकसभा में आम बजट पर चर्चा के दौरान केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरा। उन्होंने कहा कि बजट में राजस्थान की पूरी तरह अनदेखी की गई है और यह बजट गरीब, किसान, मजदूर, युवा व मध्यम वर्ग की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता।
सांसद बेनीवाल ने कहा कि सरकार हर साल “सबका साथ, सबका विकास” का नारा देती है, लेकिन बजट देखने से साफ है कि यह कुछ गिने-चुने कॉरपोरेट घरानों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। आम जनता पर अप्रत्यक्ष करों का बोझ बढ़ाया जा रहा है, जबकि अमीर-गरीब की खाई कम करने के लिए कोई ठोस विजन नहीं दिखता। उन्होंने बहुस्तरीय कर प्रणाली को नागरिकों की आय व बचत के लिए नुकसानदेह बताया।
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि देश आज भी महंगाई की मार झेल रहा है। पेट्रोल-डीजल, घरेलू गैस, खाद्य पदार्थों, दवाइयों और कीमती धातुओं के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, लेकिन बजट में महंगाई से राहत का कोई ठोस प्रावधान नहीं है। उन्होंने ईंधन और गैस की कीमतें कम करने, एमएसपी पर खरीद को कानूनी गारंटी देने और किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की मांग दोहराई।
सांसद ने कहा कि देश का युवा आज सबसे बड़ा सवाल पूछ रहा है नौकरी कहां है? बजट में रोजगार सृजन का स्पष्ट रोडमैप नहीं है। प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, भर्ती में देरी और लाखों खाली सरकारी पदों पर सरकार की चुप्पी को उन्होंने युवाओं के साथ अन्याय बताया।
उन्होंने सरकारी अस्पतालों में रिक्त पद भरने, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और सीएसआर फंड के उपयोग पर सख्त निगरानी की मांग की। एनपीएस को लेकर उन्होंने कहा कि इससे कर्मचारियों की रिटायरमेंट सुरक्षा खतरे में है, इसलिए पैरा मिलिट्री सहित सभी केंद्रीय कर्मियों के लिए ओपीएस बहाल की जाए।
हनुमान बेनीवाल ने राजस्थान को विशेष राज्य का दर्जा देने, अंतर्राज्यीय जल विवादों का निस्तारण कर पंजाब व गुजरात से हिस्से का पानी दिलाने और पश्चिमी राजस्थान के लिए नई जल योजना बनाने की मांग की। साथ ही मकराना में अंतरराष्ट्रीय मार्बल मंडी, नागौर व डीडवाना में हवाई पट्टी विकास, जीआई टैग लंबित उत्पादों को मंजूरी, केंद्रीय विश्वविद्यालय, खेल विश्वविद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, खनिज खनन और अरावली संरक्षण की मांग सदन में रखी।