रूस में फंसे भारतीयों का दर्द: सांसद बेनीवाल ने पीएम मोदी से लगाई गुहार, लापता युवाओं की वतन वापसी की मांग
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने रूस में फंसे 24 भारतीय युवाओं के परिजनों से मुलाकात के बाद पीएम मोदी और विदेश मंत्री को पत्र लिखा। उन्होंने लापता नागरिकों की सुरक्षित वापसी और उनके परिवारों को जानकारी देने की मांग की। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 211 में से 121 वापस आए, 63 सेवा में हैं और 27 की मौत हो चुकी है।
नई दिल्ली: रूस में युद्ध की आग में झुलस रहे भारतीय युवाओं की दुखद कहानी एक बार फिर सुर्खियों में है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और जम्मू जैसे राज्यों के दर्जनों युवा एजेंटों के झांसे में आकर रूसी सेना में भर्ती हो गए, जहां उन्हें सिविल जॉब का लालच दिया गया था। अब ये युवा वहां फंसे हुए हैं, और उनके परिवार वाले चिंता में डूबे हैं। इस मुद्दे को लेकर नागौर के सांसद और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के अध्यक्ष हनुमान बेनीवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह को एक भावुक पत्र लिखा है।
सांसद बेनीवाल के दिल्ली स्थित आवास पर हाल ही में 24 ऐसे फंसे युवाओं के परिजनों ने मुलाकात की। ये परिवार वाले बेहद व्यथित हैं और अपने बेटों की जान की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जता रहे हैं। बेनीवाल ने बताया कि इन युवाओं को धोखे से रूसी सशस्त्र बलों में शामिल किया गया, जहां वे अब युद्ध के मैदान में फंस चुके हैं। सांसद ने अपने पत्र में संसद के शीतकालीन सत्र में उठाए गए इस मुद्दे का जिक्र किया। विदेश मंत्रालय के जवाब के मुताबिक, कुल 211 भारतीय नागरिक इस जाल में फंसे पाए गए हैं। इनमें से 121 को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है, जबकि 63 अभी भी रूसी सेना में सेवा दे रहे हैं—इनमें से कुछ लापता भी हैं। सबसे दुखद बात यह है कि 27 भारतीय युवाओं की मौत हो चुकी है।
बेनीवाल ने पत्र में लिखा, "यह आंकड़े इस संकट की भयावहता को साफ-साफ बयां करते हैं। हमारे देश के नागरिकों की जान खतरे में है, और उनके परिवार वाले रोजाना मौत के डर में जी रहे हैं।" उन्होंने सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। खासकर लापता युवाओं की वर्तमान स्थिति के बारे में परिवारों को जानकारी देने और उनकी सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की अपील की गई है। सांसद ने कहा कि इस मुद्दे को प्राथमिकता पर रखा जाए, ताकि फंसे हुए नागरिकों को राहत मिल सके और उनके परिवारों का दर्द कम हो।
यह मामला उन एजेंटों की काली करतूतों को उजागर करता है, जो बेरोजगार युवाओं को विदेशी नौकरी के नाम पर ठगते हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच फंसे ये भारतीय युवा सहायक भूमिकाओं में काम कर रहे थे, लेकिन कई रिपोर्ट्स में उन्हें लड़ाई में धकेले जाने की बात सामने आई है। बेनीवाल की यह पहल उन परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बन सकती है, जो महीनों से अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं। सरकार की ओर से अब तक इस पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन विदेश मंत्रालय पहले भी कह चुका है कि वे रूसी अधिकारियों से संपर्क में हैं और फंसे नागरिकों की मदद कर रहे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर विदेशी नौकरी के झांसे में फंसने के खतरों पर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे एजेंटों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। बेनीवाल ने भी पत्र में ऐसे ठग एजेंटों के खिलाफ जांच की मांग की है। क्या सरकार इस मुद्दे पर तेजी से कदम उठाएगी? यह देखना बाकी है, लेकिन फंसे युवाओं के परिवारों की आंखें अब दिल्ली की ओर टिकी हैं।