जैसलमेर के रामगढ़ में सोलर कंपनी को जमीन आवंटन पर भड़के ग्रामीण, ओरण-गोचर बचाने सड़कों पर उतरे लोग
जैसलमेर के रामगढ़ में सोलर कंपनी को जमीन देने के विरोध में ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन, महिलाओं ने सौंपा ज्ञापन
जैसलमेर जिले के रामगढ़ क्षेत्र में ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण को लेकर चल रहा विरोध अब बड़े जन आंदोलन में बदल गया है। डालमिया कंपनी के खिलाफ पिछले एक महीने से जारी धरना सोमवार को उग्र हो गया। ग्रामीणों को जैसे ही कालरा तला क्षेत्र के पास एक सोलर कंपनी को जमीन आवंटन की सूचना मिली, वैसे ही खडाल क्षेत्र सहित आसपास के गांवों से हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। ग्रामीणों ने तख्तियां हाथ में लेकर ‘जन आक्रोश रैली’ निकाली और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। रैली का शुभारंभ रामगढ़ के श्रीराम मंदिर प्रांगण से हुआ, जिसमें युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए।
रैली के बाद मंदिर प्रांगण में विशाल जनसभा का आयोजन किया गया। सभा को संबोधित करते हुए महंत बाल भारती महाराज ने सरकार को कड़े शब्दों में चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि ओरण और गोचर भूमि केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि ग्रामीणों की सांस्कृतिक विरासत और आजीविका का आधार है। यदि सरकार ने इन जमीनों को निजी कंपनियों को सौंपना बंद नहीं किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि यह पूरा क्षेत्र मरुस्थलीय है और यहां के लोगों की आजीविका मुख्य रूप से पशुपालन पर निर्भर है। ओरण और गोचर भूमि मवेशियों के लिए चारागाह का काम करती है। यदि इन जमीनों पर सोलर प्लांट लगाए गए, तो पशुओं के लिए चरने की जगह नहीं बचेगी और ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ेगा।
ग्रामीणों ने बताया कि प्रस्तावित भूमि के आसपास कई प्राचीन देवस्थान, तालाब, तले और नाड़ियां स्थित हैं। इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य होने से धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचेगी। साथ ही यह इलाका कई दुर्लभ वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है, जिनके अस्तित्व पर भी खतरा मंडरा रहा है। बड़े स्तर पर निर्माण से स्थानीय पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र के बिगड़ने की आशंका जताई गई।
रैली के बाद प्रदर्शनकारी तहसील कार्यालय पहुंचे। यहां महिलाओं ने आगे बढ़कर रामगढ़ तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कालरा तला और आसपास के क्षेत्रों में सोलर कंपनियों को किए गए भूमि आवंटन को तुरंत रद्द करने और ओरण-गोचर भूमि को संरक्षित श्रेणी में घोषित करने की मांग की गई।