बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन तेज, मंत्रियों के सामने बिगड़ी अनशनकारियों की तबीयत
बीकानेर में खेजड़ी बचाओ आंदोलन के दौरान मंत्रियों के सामने अनशनकारी बेहोश, 21 की तबीयत बिगड़ी
पश्चिमी राजस्थान में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई के विरोध में चल रहा ‘खेजड़ी बचाओ’ आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता नजर आ रहा है। आंदोलन को समाप्त कराने के प्रयासों के तहत गुरुवार सुबह कौशल, रोजगार एवं उद्यमिता मंत्री केके विश्नोई और राज्य जीव-जंतु कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष जसवंत बिश्नोई बीकानेर पहुंचे। उनके अनशन स्थल पर पहुंचते ही बड़ी संख्या में लोगों ने खेजड़ी संरक्षण के समर्थन में नारे लगाए।
मंत्रियों की मौजूदगी में बेहोश हुए अनशनकारी
पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड के पास चल रहे अनशन स्थल पर सभा के दौरान अचानक स्थिति गंभीर हो गई। सभा को संबोधित कर रहे गोरधन महाराज के मंच पर मौजूद रहने के दौरान अनशनकारी मुखराम धरणीया अचानक अचेत होकर गिर पड़े। इसी समय एक महिला अनशनकारी की भी तबीयत बिगड़ गई। दोनों को तुरंत मंच के पीछे बनाए गए अस्थायी अस्पताल में भर्ती कराया गया।
चार दिन में 21 अनशनकारियों की तबीयत खराब
यह अनशन 2 फरवरी से जारी है और गुरुवार को इसका चौथा दिन रहा। सीएमएचओ पुखराज साध के अनुसार, विश्नोई धर्मशाला में बनाए गए अस्थायी अस्पताल में 18 अनशनकारी भर्ती हैं। पीबीएम अस्पताल में भी 4 लोगों को भर्ती कराया गया था, जिनमें से दो को छुट्टी दे दी गई है। बुधवार देर रात भी चार अनशनकारियों को चिकित्सा देखरेख में लेना पड़ा था।
खेजड़ी कटाई को लेकर गंभीर आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि पश्चिमी राजस्थान में सोलर प्रोजेक्ट्स के नाम पर बड़े पैमाने पर खेजड़ी के पेड़ काटे जा रहे हैं और सबूत मिटाने के लिए उन्हें जमीन में दबाया जा रहा है। इससे पहले 29 जनवरी को शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में दावा किया था कि अब तक 26 लाख खेजड़ी के पेड़ काटे जा चुके हैं और लाखों और पेड़ों पर खतरा मंडरा रहा है।
क्या हैं आंदोलनकारियों की मांगें ?
आंदोलन की प्रमुख मांगों में खेजड़ी संरक्षण के लिए नया ट्री प्रोटेक्शन एक्ट बनाने और राजस्थान काश्तकारी (टेनेंसी) अधिनियम 1955 में बेहद कम जुर्माने की राशि को बढ़ाने के साथ सख्त सजा का प्रावधान शामिल है। बीकानेर में चल रहे इस आंदोलन में बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हैं। राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, गुजरात और मध्य प्रदेश से पर्यावरण प्रेमी खेजड़ी बचाने के समर्थन में पहुंचे हैं।
राजनीतिक दलों से दूरी
आंदोलनकारियों ने साफ कर दिया है कि यह किसी राजनीतिक पार्टी का मंच नहीं है। बुधवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भंवर सिंह भाटी और गोविंदराम मेघवाल अनशन स्थल पर नजर नहीं आए, वहीं राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के नेताओं को भी मंच पर बैठने की अनुमति नहीं दी गई। सर्वसमाज ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन पूरी तरह गैर-राजनीतिक है।
लिखित आदेश तक अनशन जारी
आंदोलन का नेतृत्व कर रहे परसराम बिश्नोई ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से लिखित आदेश नहीं मिलते, तब तक अनशन समाप्त नहीं किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इस मुद्दे पर शाम तक कोई अहम घोषणा कर सकते हैं।
जैसलमेर में घर पर अनशन
खेजड़ी आंदोलन का असर बीकानेर से बाहर भी दिख रहा है। जैसलमेर जिले के लाठी क्षेत्र में पर्यावरण कार्यकर्ता राधेश्याम विश्नोई की पत्नी निरमा विश्नोई और माता रतनी देवी अपने घर पर ही अनशन पर बैठी हैं। उनका कहना है कि खेजड़ी राजस्थान की जीवनरेखा है और इसके संरक्षण के लिए ठोस नीति जरूरी हैं