4 दिन बाद भी साध्वी की रहस्यमयी मौत से नहीं उठा पर्दा, कमिश्नर के साथ SIT और FSL टीमें पहुंची साध्वी के आश्रम
प्रसिद्ध कथावाचिका और साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का मामले में 4 दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस किसी निष्कर्ष तक नहीं पहुंच पाई है। साध्वी की रहस्यमयी मौत को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं तो दूसरी तरफ उनके अनुयायी और सनातन धर्म को मानने वाले लोग यही टकटकी लगाए बैठें है कि आखिर साध्वी प्रेम बाईसा की मौत कैसे हुई ? इन सबके बीच जोधपुर कमिश्नर ओमप्रकाश और पुलिस की टीमों ने साध्वी के जोधपुर स्थित आश्रम पहुंचकर आश्रम का जायजा लिया है। पुलिस हर एक एंगल से साध्वी की मौत के बारे में जांच पड़ताल कर रही है।
जोधपुर की चर्चित कथावाचक और साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की गुत्थी 4 दिन बाद भी सुलझ नहीं पाई है।
रविवार को जोधपुर पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश ने एसआईटी और एफएसएल टीमों के साथ साध्वी के पाल रोड़ स्थित आश्रम का जायजा लेकर साक्ष्य जुटाने का प्रयास किया।
जोधपुर कमिश्नर ओमप्रकाश के मुताबिक हमारी टीमें हर एक पहलू पर गहनता से जांच करना चाहती है। ताकि, कोई पहलू रह ना जाए। आज आश्रम का जायजा लेकर हर एक चीज को बारीकी से देखा गया और पड़ताल की।
इस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट आने के बाद कुछ कहना संभव ; कमिश्नर
पुलिस कमिश्नर ओमप्रकाश के अनुसार "पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से शव का पोस्टमार्टम करवाया था। FSL सामग्री इस्टोपैथोलॉजिकल रिपोर्ट के लिए भेजी गई है। विसरा रिपोर्ट, आईटी एक्सपर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर ही पुलिस नतीजे तक पहुंच पाएगी। मामले की गंभीरता और जनभावनाओं के आधार पर पुलिस सोशल मीडिया अकाउंट को भी खंगाल रही है।"
हर पहलू पर की जा रही पूछताछ
कमिश्नर के मुताबिक साध्वी के मौत से जुड़े पूरे घटनाक्रम को लेकर पुलिस मामले से जुड़े हर एक व्यक्ति को बुलाकर उनके बयान ले रही है। संयुक्त जांच के बाद ही पुलिस किसी नतीजे तक पहुंच पाएगी। कमिश्नर ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कॉज ऑफ डेथ नहीं आया है। इसलिए पैथोलॉजिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उसी के आधार पर कुछ कहना संभव होगा।
28 जनवरी को हुई थी साध्वी की संदिग्ध मौत
28 जनवरी को साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। उनकी मौत को लेकर उनके अनुयायियों ने कई सवाल खड़े किए थे। 29 जनवरी को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद उनका शव परिजनों को सुपुर्द कर दिया था।
इसके बाद 30 जनवरी को बालोतरा जिले के परेऊ गांव (साध्वी का पैतृक गांव) में साध्वी का परंपरागत तरीके से समाधि देकर अंतिम संस्कार किया गया।
साध्वी प्रेम बाईसा के पिता वीरम नाथ ने बताया था कि "उन्हें मामूली जुकाम था और गले में खराश थी।"
तबियत बिगड़ी तो आश्रम में ही एक कंपाउंडर को बुलाया गया था। कंपाउंडर द्वारा इंजेक्शन लगाने के कुछ ही समय बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और श्वास लेने में भी दिक्कत होने लगी। ऐसी हालत में उन्हें जोधपुर के एक निजी अस्पताल (प्रेक्षा हॉस्पिटल) ले जाया गया। जहां डॉक्टर्स ने काफी कोशिश की। लेकिन, उनको बचाया नहीं जा सका।