बामणोर CHC की बदहाली: टीन शेड के नीचे इलाज, खिड़की से जांच को मजबूर डॉक्टर
बामणोर CHC में न कमरे हैं न बेड, टीन शेड के नीचे मरीजों का इलाज, सरकारी दावों की खुली पोल
राजस्थान के बामणोर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) की हालत प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। यहां डॉक्टरों के पास OPD चलाने के लिए पक्के कमरे तक नहीं हैं। मरीज टीन शेड के नीचे खाटों पर लेटते हैं, जबकि ग्लूकोज की बोतलें खूंटियों में टांगकर चढ़ाई जा रही हैं। कई बार हालात ऐसे बन जाते हैं कि डॉक्टरों को खिड़की के बाहर से ही मरीजों की नब्ज टटोलनी पड़ती है।
एक तरफ़ भारत आज विकसित देशों के साथ कदमताल कर रहा है लेकिन हालात देश के हिस्सों में पुराने दौर जैसे हालत बने हुए है जहाँ नागरिक अपनी मूलभूत सुविधाओं के सपने देख रहे है। ऐसे समय में जब देश को ‘विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था’ बनाने के दावे किए जा रहे हैं, बामणोर CHC की स्थिति इन दावों की सच्चाई उजागर कर रही है। यहां संसाधनों की कमी इतनी गंभीर है कि पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था ही मानो वेंटिलेटर पर चल रही हो।
सरकारी मानकों के अनुसार CHC स्तर पर 30 बेड का अस्पताल होना चाहिए, जहां मरीजों के लिए पर्याप्त वार्ड, जांच सुविधाएं और डॉक्टरों के लिए कार्य कक्ष हों। लेकिन बामणोर में ये मानक केवल कागजों तक सीमित हैं। न पर्याप्त कमरे हैं, न ही मूलभूत ढांचा, जिससे मरीजों को इलाज के दौरान भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
बामणोर का उप-स्वास्थ्य केंद्र वर्ष 2013 में PHC में क्रमोन्नत किया गया था, लेकिन हैरानी की बात यह है कि 2023 तक इसकी पक्की इमारत तक नहीं बन पाई। इसके बावजूद वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान बिना PHC भवन के ही इसे CHC में क्रमोन्नत कर दिया गया। अब ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन हालात में कोई ठोस सुधार नहीं हुआ है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार की घोषणाएं ज़मीनी हकीकत से कोसों दूर हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन बाद में उन पर अमल नहीं होता। स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधा में लापरवाही जनता के भरोसे को कमजोर कर रही है। अस्पताल में आने वाले मरीज इलाज के साथ-साथ अव्यवस्था से भी जूझ रहे हैं। वहीं डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ सीमित संसाधनों में काम करने को मजबूर हैं। बामणोर CHC की स्थिति यह बताने के लिए काफी है कि केवल क्रमोन्नति के आदेश जारी करना ही काफी नहीं, जब तक ज़मीनी स्तर पर सुविधाएं नहीं पहुंचतीं।