राजस्थान के अस्पतालों में आवारा कुत्तों पर सख्ती, डॉक्टर बनाए गए नोडल अधिकारी

राजस्थान के जोधपुर और जैसलमेर के सरकारी अस्पतालों में आवारा कुत्तों की एंट्री रोकने के लिए डॉक्टरों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।

Feb 8, 2026 - 14:31
राजस्थान के अस्पतालों में आवारा कुत्तों पर सख्ती, डॉक्टर बनाए गए नोडल अधिकारी

राजस्थान में सरकारी स्कूलों के बाद अब सरकारी अस्पतालों में भी आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर सख्त कदम उठाए गए हैं। जोधपुर और जैसलमेर के कुछ सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। इन डॉक्टरों की जिम्मेदारी होगी कि अस्पताल परिसर में आवारा कुत्तों की एंट्री न हो और जरूरत पड़ने पर उन्हें पकड़वाने की कार्रवाई की जाए।यह व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की पालना में लागू की गई है। कोर्ट के आदेश के तहत अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर आवारा जानवरों की मौजूदगी को रोकना जरूरी माना गया है, ताकि मरीजों और स्टाफ की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

जोधपुर के प्रतापनगर अस्पताल में डॉ. नरेश चौहान और मंडोर सैटेलाइट अस्पताल में डॉ. निर्मला बिश्नोई को नोडल अधिकारी बनाया गया है। वहीं जैसलमेर के जवाहिर अस्पताल में डेंटिस्ट डॉ. सरदाराराम पंवार को यह जिम्मेदारी दी गई है। इन तीनों अस्पतालों में लिखित आदेश जारी कर यह व्यवस्था लागू कर दी गई है। जैसलमेर के पीएमओ डॉ. रविंद्र सांखला ने बताया कि राज्य सरकार का स्पष्ट निर्देश है कि अस्पताल परिसर में कुत्ते नहीं होने चाहिए। इसी कारण डॉक्टरों को नोडल अधिकारी बनाकर जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नोडल अधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि अस्पताल के गेट बंद रहें और चारदीवारी से कहीं भी कुत्ते अंदर न आ सकें। जहां दीवारें नीची होंगी, वहां उन्हें ऊंचा करवाने का प्रस्ताव तैयार किया जाएगा। यदि परिसर में कुत्तों की संख्या ज्यादा होती है, तो नगर निगम या नगर परिषद की टीम से संपर्क कर उन्हें सुरक्षित तरीके से बाहर निकलवाया जाएगा। इसके साथ ही पूरी व्यवस्था की समय-समय पर रिपोर्ट तैयार कर उच्च अधिकारियों को भेजी जाएगी।

विशेषज्ञों के अनुसार देश में एनिमल हेल्थकेयर और कंट्रोल का प्रभावी सिस्टम नहीं है। आवारा कुत्तों की नसबंदी और नियंत्रण पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता। इसके अलावा कई लोग अपने पालतू जानवरों को छोड़ देते हैं या खुला घूमने देते हैं, जिससे आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है।

डॉग बाइट की घटनाएं अब सिर्फ ग्रामीण या भीड़भाड़ वाले इलाकों तक सीमित नहीं रहीं। यह पूरे देश में एक बड़ी समस्या बन चुकी है। भारत आज भी रेबीज से होने वाली मौतों के मामलों में दुनिया में सबसे ऊपर है। नियम बने होने के बावजूद एनीमल बर्थ कंट्रोल का सही पालन नहीं हो पा रहा है।