स्वर्णनगरी में लोक-संस्कृति का महासंगम कल से शुरू : जैसलमेर का मरू महोत्सव बनेगा देश-विदेश के सैलानियों का आकर्षण।
जैसलमेर में आयोजित होने वाला मरू महोत्सव राजस्थान की लोक-संस्कृति, परंपराओं और मरुस्थलीय जीवनशैली का भव्य उत्सव है। लोक-संगीत, नृत्य, ऊंट प्रतियोगिताओं और हस्तशिल्प प्रदर्शनी के साथ यह महोत्सव देश-विदेश के पर्यटकों को आकर्षित करता है। ‘मिस डेजर्ट’, ‘मिस्टर डेजर्ट’, ‘मिस मूमल’ जैसी प्रतियोगिताएं पारंपरिक नारी-पुरुष गौरव और लोकगाथाओं को मंच प्रदान करती हैं, वहीं मूमल की प्रेम कथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से जीवंत होती है। यह आयोजन जैसलमेर की सांस्कृतिक पहचान को सशक्त करते हुए पर्यटन और स्थानीय कलाकारों को नई दिशा देता है।
जैसलमेर
राजस्थान की स्वर्णनगरी जैसलमेर एक बार फिर अपने पारंपरिक रंगों, लोक-संगीत और मरुस्थलीय संस्कृति की भव्य छटा बिखेरने को तैयार है। हर वर्ष आयोजित होने वाला मरू महोत्सव (Desert Festival) न केवल राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए भी विशेष आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है।
मरुस्थल की रेत पर सजी यह सांस्कृतिक छटा जैसलमेर के ऐतिहासिक स्थलों—सम के रेत धोरों, गड़ीसर झील और सोनार किले—को जीवंत मंच में बदल देती है। लोक परंपराओं, रीति-रिवाजों और कला का यह उत्सव जैसलमेर की पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूती प्रदान करता है।
लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां बनेगी मुख्य आकर्षण
मरू महोत्सव में राजस्थान के प्रसिद्ध मांगणियार और लंगा कलाकारों की लोक-संगीत प्रस्तुतियां, कालबेलिया और घूमर नृत्य दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। पारंपरिक वाद्य यंत्रों की गूंज और लोकगीतों की मिठास मरुस्थल की शांत रातों को जीवंत बना देती है।
ऊंटों की साज-सज्जा और अनोखी प्रतियोगिताएं
महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण ऊंट साज-सज्जा प्रतियोगिता रहती है, जिसमें रंग-बिरंगे परिधानों और आभूषणों से सजे ऊंट पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं। इसके अलावा ऊंट दौड़, पगड़ी बांध प्रतियोगिता, मूंछ प्रतियोगिता और रस्साकशी जैसी पारंपरिक गतिविधियां लोगों में खासा उत्साह भरती हैं।
मरू महोत्सव का पुरुष गौरव: ‘मिस्टर डेजर्ट’ प्रतियोगिता
‘मिस्टर डेजर्ट’ प्रतियोगिता मरू महोत्सव की सबसे विशिष्ट और लोकप्रिय प्रतियोगिताओं में से एक है। यह प्रतियोगिता राजस्थानी पुरुष के पारंपरिक व्यक्तित्व, शौर्य और सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती है।
प्रतियोगिता में प्रतिभागी पारंपरिक धोती-कुर्ता, अंगरखा, साफा (पगड़ी) और मूंछों के पारंपरिक अंदाज में मंच पर आते हैं। निर्णायक मंडल द्वारा पारंपरिक वेशभूषा, पगड़ी बांधने की कला, मूंछों की साज-संवार, आत्मविश्वास और लोक-संस्कृति की समझ के आधार पर मूल्यांकन किया जाता है।
‘मिस्टर डेजर्ट’ का खिताब मरुस्थलीय जीवनशैली, स्वाभिमान और लोक परंपराओं के प्रतीक पुरुष को प्रदान किया जाता है।
लोकगाथा से मंच तक: ‘मिस मूमल’ प्रतियोगिता
‘मिस मूमल’ प्रतियोगिता जैसलमेर की प्रसिद्ध लोकगाथा मूमल से प्रेरित है। यह प्रतियोगिता सौंदर्य के साथ-साथ बुद्धिमत्ता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना को भी महत्व देती है।
प्रतिभागी युवतियां पारंपरिक राजस्थानी परिधान, आभूषण और श्रृंगार में मंच पर प्रस्तुति देती हैं। प्रतियोगिता में उनके व्यक्तित्व, आत्मविश्वास, लोककथाओं व परंपराओं की जानकारी और अभिव्यक्ति क्षमता का आकलन किया जाता है।
‘मिस मूमल’ का खिताब उस प्रतिभागी को दिया जाता है, जो मूमल के गौरव, चतुराई और गरिमा को सबसे बेहतर ढंग से प्रस्तुत करती है।
स्थानीय हस्तशिल्प और व्यंजनों की झलक
मरू महोत्सव के दौरान स्थानीय कारीगरों द्वारा निर्मित हस्तशिल्प, कढ़ाई, लकड़ी और पत्थर की कलाकृतियां प्रदर्शित की जाती हैं। साथ ही, पर्यटकों को राजस्थानी व्यंजनों—दाल-बाटी-चूरमा, केर-सांगरी और घेवर—का स्वाद चखने का अवसर भी मिलता है।
पर्यटन को मिलती नई पहचान
मरू महोत्सव जैसलमेर के पर्यटन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। यह उत्सव न केवल स्थानीय कलाकारों और कारीगरों को मंच प्रदान करता है, बल्कि रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देता है। हर वर्ष बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक इस आयोजन के जरिए राजस्थान की लोक-संस्कृति से रूबरू होते हैं।
संस्कृति संरक्षण का जीवंत उदाहरण
मरू महोत्सव केवल एक उत्सव नहीं, बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार का सशक्त माध्यम है। मरुस्थलीय जीवनशैली, लोककला और परंपराओं को सहेजते हुए यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करता है।