जैसलमेर में ओरण बचाओ पदयात्रा तेज, गोचर भूमि संरक्षण को लेकर लाठी पहुंची टीम ओरण
जैसलमेर में ओरण बचाओ पदयात्रा लाठी पहुंची। गोचर भूमि को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग तेज।
राजस्थान के जैसलमेर जिले में ओरण और गोचर भूमि के संरक्षण को लेकर चल रही ‘ओरण बचाओ पदयात्रा’ अब तेज होती जा रही है। बुधवार देर शाम यह पदयात्रा जैसलमेर जिले के लाठी कस्बे में पहुंची। यहां स्थानीय लोगों ने टीम ओरण का भव्य स्वागत किया। समाज के सभी वर्गों के सैकड़ों लोग पदयात्रियों से जुड़े और फूल-मालाओं के साथ उनका अभिनंदन किया। इस दौरान पूरे क्षेत्र में पर्यावरण संरक्षण और ओरण बचाने के नारे गूंजते रहे।
गोचर और ओरण भूमि को लेकर संघर्ष
‘टीम ओरण’ की यह पदयात्रा गोचर भूमि, ओरण, तालाब और कैचमेंट एरिया को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग को लेकर निकाली जा रही है। टीम का कहना है कि ओरण और चारागाह भूमि ग्रामीण जीवन, पशुपालन और पर्यावरण संतुलन के लिए बेहद जरूरी हैं। यदि इन्हें सुरक्षित नहीं किया गया तो आने वाले समय में रेगिस्तानी क्षेत्रों में गंभीर पर्यावरणीय संकट खड़ा हो सकता है।
लाठी में हुआ भव्य स्वागत
बुधवार को जब पदयात्रा लाठी पहुंची, तो गांव के लोगों ने पारंपरिक तरीके से स्वागत किया। पदयात्रियों पर फूल बरसाए गए और माला पहनाई गई। इस मौके पर ग्रामीणों ने कहा कि ओरण केवल जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि आस्था, संस्कृति और आजीविका से जुड़ा विषय है। स्थानीय लोगों ने पदयात्रा को अपना पूर्ण समर्थन देने की बात कही।
जयपुर तक जाएगा मार्च
पर्यावरणविद सुमेर सिंह सांवता ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि सरकार हमारे सब्र की परीक्षा न ले। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर विनाश स्वीकार नहीं किया जाएगा। यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया, तो टीम ओरण जयपुर पहुंचकर अनिश्चितकालीन विरोध प्रदर्शन करेगी। उन्होंने बताया कि तनोट राय माता मंदिर से शुरू हुई यह पदयात्रा करीब 725 किलोमीटर का सफर तय कर जयपुर पहुंचेगी।
सरकार को चेतावनी, गंभीर नतीजों की बात
टीम के सदस्य भोपाल सिंह झलोड़ा ने कहा कि जिन जमीनों के संरक्षण के लिए लोगों ने कुर्बानी दी है, उन्हें कंपनियों के हवाले नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने जैसलमेर की ओरण और गोचर भूमि को आरक्षित नहीं किया, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। उनका कहना है कि रेगिस्तान की शांति और प्रकृति से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
धरने से पदयात्रा तक का सफर
टीम ओरण से जुड़े महंत महादेव पुरी महाराज ने बताया कि तीन महीने पहले जैसलमेर कलेक्टर कार्यालय के बाहर इस मुद्दे को लेकर 34 दिन तक धरना दिया गया था। उस समय प्रशासन और जनप्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था कि ओरण, नाड़ी और अन्य पारंपरिक जल-स्रोतों को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा। लेकिन तीन महीने बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी वजह से तनोट राय माता मंदिर से जयपुर तक पैदल यात्रा शुरू की गई है।
रोजाना 30 किलोमीटर की पदयात्रा
टीम ओरण प्रतिदिन करीब 30 किलोमीटर पैदल चलती है। लाठी में रात्रि विश्राम के बाद गुरुवार सुबह सूरज उगते ही यात्रा फिर शुरू हुई। “जय तनोट राय” के नारों के साथ यह कारवां आगे बढ़ता है। दिनभर चलने के बाद यात्रा शाम को किसी गांव, मंदिर या खुले स्थान पर रुकती है। यात्रा में युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी वर्गों के लोग शामिल हैं, जो एक दरी पर बैठकर अपने हक और पर्यावरण की रक्षा की बात करते हैं।
पर्यावरण बचाने का संदेश
‘टीम ओरण’ की यह पदयात्रा केवल जमीन के अधिकार की लड़ाई नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी देती है। ओरण, चारागाह और जल-स्रोतों को बचाने के लिए उठी यह आवाज अब जैसलमेर से निकलकर पूरे राजस्थान में गूंजने लगी है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सरकार इस आंदोलन पर क्या कदम उठाती है।