जैसलमेर में जासूसी का खुलासा, हनीट्रैप में फंसकर ई-मित्र संचालक ने ISI को बेचे सेना के राज!
जैसलमेर में ISI की बड़ी साजिश नाकाम! हनीट्रैप और पैसों के लालच में ई-मित्र संचालक ने भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी पाकिस्तान भेजी। वॉट्सऐप का 'ओटीपी' शेयर कर जासूस ने खोली सीमा की सुरक्षा।
जैसलमेर से एक बार फिर पाकिस्तान के लिए जासूसी करने वाले एक आदमी को गिरफ्तार किया गया है। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राजस्थान इंटेलिजेंस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पोकरण के नेडान गांव निवासी झबराराम को हिरासत में लिया था, जिसे लंबी पूछताछ के बाद 30 जनवरी को विधिवत गिरफ्तार कर लिया गया है।
कैसे बिछाया गया जासूसी का जाल?
आरोपी झबराराम पिछले 4 साल से अपने गांव में ई-मित्र की दुकान चला रहा था। जांच में सामने आया कि पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI के हैंडलर्स ने उसे हनीट्रैप और पैसों के लालच में फंसाया था। आरोपी ने न केवल भारतीय सेना की गोपनीय जानकारी साझा की बल्कि अपनी देशभक्ति को ताक पर रखकर दुश्मन देश की मदद भी की। इन दिनों सीमावर्ती क्षेत्रों में इस तरह की जालसाजी पाकिस्तान द्वारा अपनाई जा रही है।
वॉट्सऐप का पाकिस्तानी कनेक्शन
जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा वॉट्सऐप को लेकर हुआ है। आरोपी ने अपने नाम से एक सिम खरीदी और उस पर आए ओटीपी को पाकिस्तानी हैंडलर्स को भेज दिया। इससे फायदा यह हुआ कि आरोपी के भारतीय नंबर पर बना वॉट्सऐप अकाउंट पाकिस्तान में बैठे एजेंट चलाने लगे। इसके जरिए वे भारतीय सेना की मूवमेंट और सामरिक महत्व की सूचनाएं मंगवाते और साझा करते थे।
कौन सी जानकारियां भेजी गईं?
सीमावर्ती इलाकों में जासूसों का मुख्य काम दुश्मन देश के लिए छोटी से छोटी जानकारी जुटाना होता है। झबराराम पर सैन्य टुकड़ियों की आवाजाही और उनके ठिकानों की जानकारी, सेना की बिल्डिंग्स, स्कूल, हॉस्टल और एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक्स की तस्वीरें और लोकेशन संबंधी जानकारियाँ साझा करने के आरोप है। इसके अलावा सीमा पर बनने वाले नए पुल, सड़कें, मोबाइल टावर और फेंसिंग की डिटेल तथा बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) और उनके आसपास की भौगोलिक स्थिति की सूचनाएं भी भेजने के आरोप है।
सुरक्षा एजेंसियों की सख्त कार्रवाई
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (इंटेलिजेंस) प्रफुल्ल कुमार के अनुसार, सुरक्षा एजेंसियां लंबे समय से झबराराम की गतिविधियों पर नजर रख रही थीं। संदिग्ध पाए जाने पर उसे जयपुर स्थित केंद्रीय पूछताछ केंद्र ले जाया गया। संयुक्त पूछताछ और मोबाइल की फोरेंसिक जांच में देश विरोधी गतिविधियों के पुख्ता सबूत मिलने के बाद, आरोपी के खिलाफ शासकीय गुप्त बात अधिनियम 1923 के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन से लोग शामिल हैं और अब तक कितनी संवेदनशील जानकारी सीमा पार भेजी जा चुकी है।