राजस्थान हाईकोर्ट बोला 2046 तक देश में बच्चों से ज्यादा होंगे बुजुर्ग

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी 31 वृद्धाश्रमों की व्यापक जांच के आदेश दिए हैं। बुजुर्गों को मिलने वाली चिकित्सा, भोजन, साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर 15 फरवरी तक रिपोर्ट मांगी गई है।

Feb 9, 2026 - 17:20
राजस्थान हाईकोर्ट बोला 2046 तक देश में बच्चों से ज्यादा होंगे बुजुर्ग

राजस्थान के सभी 31 वृद्धाश्रमों की अब व्यापक जांच होगी। इन आश्रमों में रह रहे बुजुर्गों को वास्तव में कैसी सुविधाएं मिल रही हैं, इसका सच सामने लाने के लिए राजस्थान हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने चिकित्सा सुविधा, भोजन की गुणवत्ता, भवन की स्थिति, साफ-सफाई और सुरक्षा व्यवस्था समेत तमाम अहम बिंदुओं पर 15 फरवरी तक विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

राजस्थान हाईकोर्ट की जयपुर बेंच ने यह जिम्मेदारी राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और सभी जिला विधिक सेवा प्राधिकरणों को सौंपी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने वृद्धाश्रमों की मौजूदा स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई और साफ कहा कि ये संस्थान केवल कागजी औपचारिकता बनकर नहीं रह सकते।

लोक उत्थान संस्थान की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस पुष्पेंद्र सिंह भाटी और जस्टिस संगीता शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि वृद्धाश्रमों में रहने वाले बुजुर्गों को सम्मान, बेहतर चिकित्सा, सुरक्षा और मानवीय गरिमा के साथ जीवन जीने का अधिकार मिलना चाहिए।

कोर्ट ने भारतीय संस्कृति का उल्लेख करते हुए कहा कि हमारे समाज में बुजुर्गों को भगवान का दर्जा दिया जाता रहा है, लेकिन आधुनिक जीवनशैली, संयुक्त परिवारों के विघटन और शहरीकरण ने उन्हें उपेक्षित और असहाय बना दिया है। बेंच ने टिप्पणी की कि वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल अब सिर्फ परिवार की नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि एक संवैधानिक जिम्मेदारी भी है।

अदालत ने बुजुर्गों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए इसे “खतरे की घंटी” करार दिया। कोर्ट ने विभिन्न रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए बताया कि वर्ष 2022 में देश में बुजुर्गों की आबादी कुल जनसंख्या का लगभग 10.5 प्रतिशत थी, जो 2050 तक 20 प्रतिशत से अधिक हो सकती है। वहीं, 2046 तक देश में बुजुर्गों की संख्या बच्चों से भी ज्यादा होने का अनुमान है।

कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि अभी से ठोस और प्रभावी व्यवस्था नहीं की गई, तो भविष्य में यह स्थिति एक बड़े सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रदेश में 31 वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं। इस पर कोर्ट ने कहा कि सिर्फ संख्या बताना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह देखना ज्यादा जरूरी है कि इन आश्रमों में बुजुर्गों के लिए वास्तव में कैसी व्यवस्थाएं मौजूद हैं।

याचिकाकर्ता संस्था की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता नितिन सोनी ने कोर्ट को बताया कि सरकार की सूची में कई पुनर्वास केंद्रों को भी वृद्धाश्रम के रूप में दर्शाया गया है, जबकि हकीकत में वे वृद्धाश्रम नहीं हैं। इस पर कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए विस्तृत रिपोर्ट तलब करने के आदेश दिए।