मिर्च की आड़ में ड्रग तस्करी का खुलासा, निजी बसों से भेजी जा रही थी एमडी और स्मैक
निजी बसों के पार्सल में मथानिया की हरी मिर्च के बहाने ड्रग्स तस्करी का चौंकाने वाला तरीका उजागर हुआ।
ड्रग तस्करों ने नशे की खेप पहुंचाने के लिए ऐसा तरीका अपनाया, जिसने जांच एजेंसियों को भी चौंका दिया है। अब तक ट्रक या विशेष रूप से मॉडिफाइड वाहनों में ड्रग्स छिपाने के मामले सामने आते रहे हैं, लेकिन इस बार निजी बसों के जरिए पार्सल के नाम पर ड्रग्स सप्लाई की जा रही थी। चौंकाने वाली बात यह है कि मथानिया और सोयला क्षेत्र की मशहूर हरी मिर्च की आड़ में एमडी ड्रग्स और स्मैक भेजी जा रही थी।
ड्राइवर की सतर्कता से खुला राज
सूत्रों के अनुसार यह पार्सल जोधपुर से हैदराबाद भेजा जा रहा था। निजी बस के चालक को पार्सल में कुछ गड़बड़ लगी, क्योंकि कुछ मिर्चों में चीरा दिखाई दिया। संदेह होने पर चालक ने पार्सल खोलकर देखा। ऊपर की परत में सामान्य हरी मिर्च थी, लेकिन नीचे की मिर्चों में चीरा लगाकर चमकीले पेपर में लिपटी ड्रग्स छिपाई गई थी। बताया जा रहा है कि एक-एक मिर्च की कीमत करीब पांच हजार रुपये तक आंकी जा रही थी।
वीडियो बनाकर एनसीबी को दी सूचना
ड्राइवर ने पूरे मामले का वीडियो बनाया और तुरंत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) को इसकी सूचना दी। इस सतर्कता के चलते एक नए तस्करी पैटर्न का खुलासा हुआ है। एनसीबी अब इस तरीके को ध्यान में रखते हुए आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।
मथानिया-सोयला क्षेत्र पर बढ़ेगी निगरानी
एनसीबी के अनुसार, निजी बसों के जरिए पार्सल में ड्रग्स भेजने की सूचनाएं पहले भी मिलती रही हैं, लेकिन हरी मिर्च के बहाने ड्रग्स भेजने का मामला पहली बार सामने आया है। इसके बाद मथानिया और सोयला क्षेत्र से होने वाली पार्सल गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाएगी।
‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत सख्त कार्रवाई
एनसीबी के जोनल डायरेक्टर घनश्याम सोनी ने बताया कि इस नेटवर्क को तोड़ने के लिए ‘ऑपरेशन त्रिनेत्र’ के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे। उन्होंने आम जनता से अपील की कि यदि कहीं भी नशे से जुड़ी गतिविधि की जानकारी मिले तो एनसीबी की हेल्पलाइन मानस 1933 पर सूचना दें। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गुप्त रखी जाएगी। एनसीबी का कहना है कि नशे के खिलाफ इस लड़ाई में समाज की भागीदारी बेहद जरूरी है, ताकि युवाओं को इस खतरे से बचाया जा सके।