राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: सरकारी स्कूलों की बदहाली पर शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार

जर्जर स्कूल भवन, बच्चियों के लिए टॉयलेट नहीं, फंड की कमी पर हाईकोर्ट की तीखी टिप्पणी, शिक्षा सचिव तलब

Feb 2, 2026 - 19:05
राजस्थान हाईकोर्ट सख्त: सरकारी स्कूलों की बदहाली पर शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार

राजस्थान हाईकोर्ट ने प्रदेश के सरकारी स्कूलों की जर्जर इमारतों और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। जयपुर बेंच में जस्टिस महेंद्र गोयल और जस्टिस अशोक कुमार जैन की खंडपीठ ने इस मामले में राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से तीखे सवाल किए।

बच्चियों के लिए टॉयलेट तक नहीं

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल से कहा कि सरकार स्वच्छ भारत मिशन की बातें तो करती है, लेकिन स्कूलों में बच्चियों के लिए शौचालय तक की समुचित व्यवस्था नहीं कर पा रही है। कोर्ट ने कहा कि टॉयलेट नहीं होने के कारण कई बच्चियां स्कूल में पानी तक नहीं पीतीं, क्योंकि उन्हें बार-बार बाहर जाना पड़ता है। ऐसी स्थिति में हम बच्चों और समाज को जवाब नहीं दे पा रहे हैं।

झालावाड़ स्कूल हादसे पर सुनवाई

यह टिप्पणी झालावाड़ स्कूल हादसे को लेकर स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान की गई। कोर्ट ने शिक्षा सचिव को निर्देश दिए कि वह मुख्य सचिव और वित्त सचिव से मिलकर बजट में आवश्यक फंड का प्रावधान सुनिश्चित करें।

पेड़ भी गवाही देने आते हैं’

सुनवाई के दौरान शिक्षा सचिव ने बताया कि फिलहाल कई जगहों पर बच्चों की पढ़ाई पेड़ों के नीचे या निजी भवनों में करवाई जा रही है। इस पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि आप पिछले सात महीने से यही जवाब दे रहे हैं। कई स्थानों पर तो पेड़ भी नहीं हैं, वहां क्या व्यवस्था की गई है। कोर्ट ने कहा कि आज तकनीक के दौर में वास्तविक हालात छुपाए नहीं जा सकते, यहां तो पेड़ भी गवाही देने आते हैं।

फंड की कमी का हवाला

शिक्षा सचिव कृष्ण कुणाल ने बताया कि प्रदेश के सभी जर्जर स्कूल भवनों की मरम्मत और नए निर्माण के लिए करीब 20 हजार करोड़ रुपए की जरूरत है। केंद्र सरकार से पर्याप्त बजट नहीं मिल रहा है, इसलिए राज्य सरकार सीएसआर और एमपी-एमएलए फंड से राशि जुटाने की कोशिश कर रही है। इस पर कोर्ट ने कहा कि इसके बावजूद फंड की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

अधिकारियों को कड़ी चेतावनी

कोर्ट ने अधिकारियों को फटकार लगाते हुए कहा कि सड़कें रातों-रात बन जाती हैं, लेकिन बच्चों के लिए बुनियादी सुविधाएं नहीं हो पा रहीं। साथ ही कोर्ट ने स्पष्ट किया कि राजनेताओं को दोष देने के बजाय अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाएं, क्योंकि राजनेता तो सिर्फ ट्रांसफर पर ध्यान देते हैं।