अडानी मुद्दे पर सियासत गरम: सत्ता बदली तो बदला नजरिया, सदन में उठा बड़ा सवाल
राजस्थान विधानसभा में अडानी को लेकर घमासान, तारीफ से आरोप तक का सियासी विरोधाभास उजागर
राजस्थान विधानसभा में एक बार फिर अडानी समूह को लेकर सियासी बहस तेज हो गई।राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने सदन में भजनलाल सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को दिल्ली बुलाकर “धमकाया” जा रहा है। डोटासरा ने कहा कि अडानी जैसे बड़े उद्योगपतियों के मामले में राज्य सरकार स्वतंत्र निर्णय नहीं ले पा रही है और केंद्र के दबाव में काम कर रही है।
पुरानी तारीफों की याद
हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब अडानी का नाम राजस्थान की राजनीति में गूंजा हो। पिछली सरकार के कार्यकाल में भी मंचों से अडानी की खुलकर प्रशंसा की जाती रही है। सदन में ही दिए गए पुराने बयानों का हवाला देते हुए कहा गया कि तब अडानी को देश के विकास में योगदान देने वाला उद्योगपति बताया जाता था। यहां तक कि राजस्थान के लोगों की हिम्मत और उद्यमशीलता की मिसाल देते हुए अडानी की सफलता की तारीफ की गई थी।
आज सवाल, कल बधाई
एक समय ऐसा भी रहा है जब अडानी का नाम दुनिया के सबसे अमीर लोगों में शामिल होने पर उन्हें बधाई दी जाती थी। उनके उद्योग साम्राज्य को राज्य के लिए अवसर के रूप में देखा जाता था। तब न तो किसी “धमकी” की बात होती थी और न ही किसी दबाव का आरोप लगाया जाता था। अब वही नाम विवाद और आरोपों का केंद्र बन गया है।
कुर्सी बदलते ही नजरिया क्यों?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि असल फर्क व्यक्ति या उद्योगपति में नहीं, बल्कि सत्ता की कुर्सी में होता है। जब कोई दल सत्ता में होता है तो बड़े उद्योगपति विकास के साझेदार नजर आते हैं, और विपक्ष में बैठते ही वही मुद्दा सवालों के घेरे में आ जाता है। अडानी को लेकर चल रही मौजूदा बहस भी इसी राजनीतिक विरोधाभास को उजागर करती है।