आसमानी आफत राजस्थान में ओलों का कहर,अफीम बचाने को किसानों ने लगाया गजब का 'ग्लास जुगाड़'।

राजस्थान में ओलावृष्टि से फसलें तबाह भीलवाड़ा के किसानों ने अफीम बचाने को अपनाया अनोखा देसी तरीका।

Feb 19, 2026 - 10:31
आसमानी आफत राजस्थान में ओलों का कहर,अफीम बचाने को किसानों ने लगाया गजब का 'ग्लास जुगाड़'।

राजस्थान - प्रदेश में बीते 24 घंटों के भीतर मौसम के बदले मिजाज ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है भीलवाड़ा,कोटा,राजसमंद और झुंझुनूं समेत कई जिलों में हुई तेज बारिश और ओलावृष्टि ने खेतों में खड़ी और कटी हुई फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है कहीं बेर के आकार के ओलों ने सरसों और चने की फलियों को झाड़ दिया,तो कहीं आकाशीय बिजली गिरने से किसानों के कृषि उपकरणों को नुकसान पहुंचा है इस प्राकृतिक आपदा के बीच सबसे ज्यादा चर्चा भीलवाड़ा के अफीम किसानों की हो रही है,जिन्होंने अपनी कीमती फसल बचाने के लिए एक बेहद अनोखा रास्ता निकाला है।

खेतों में बिछी सफेद चादर,मंडियों में भीगा अनाज

राजस्थान के अलग-अलग हिस्सों में बुधवार को हुई ओलावृष्टि ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं राजसमंद के केलवा और कुंवारिया में बेर के आकार के ओले गिरे,जिससे फसलें जमीन पर बिछ गईं वहीं,कोटा की भामाशाह मंडी में खुले में रखा भारी मात्रा में अनाज भीग गया, जिससे व्यापारियों और किसानों को आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है कोटा और बारां जिले में लहसुन व सरसों की कटी हुई फसलें पानी में डूबने से खराब होने की कगार पर हैं।

झुंझुनूं के पिलानी और चिड़ावा क्षेत्र में भी चने के आकार के ओले गिरे हैं। हालांकि, जानकारों का कहना है कि गेहूं की खड़ी फसल के लिए हल्की बारिश फायदेमंद है,लेकिन तेज हवाओं के कारण फसलें आड़ी-तिरछी हो गई हैं। हनुमानगढ़ के भादरा में तो आकाशीय बिजली का कहर देखने को मिला,जहां भिरानी गांव में मकानों के बिजली उपकरण जल गए और एक ट्रैक्टर की बैटरी तक फट गई।

डिस्पोजल ग्लास बना अफीम का 'कवच'

किसान अब अफीम के प्रत्येक डोडे के ऊपर प्लास्टिक या कागज के डिस्पोजल ग्लास को उल्टा करके लगा रहे हैं,ताकि बारिश का पानी सीधे डोडे पर न गिरे नीलगायों और तोतों से बचाने के लिए पहले से ही जाल और गोफन का पहरा था,लेकिन अब इस 'डिस्पोजल कवच' ने अफीम को आसमानी आफत से बचाने का जिम्मा संभाल लिया है किसानों का कहना है कि अगर यह देसी जुगाड़ न अपनाते,तो पूरी फसल पानी में बह जाती फिलहाल,किसानों की नजरें आसमान पर टिकी हैं और वे जल्द से जल्द अपनी बची हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की जद्दोजहद में जुटे हैं।