साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामले में 20 दिन बाद कंपाउंडर पर FIR

जोधपुर में साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत के 20 दिन बाद कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है।

Feb 17, 2026 - 13:43
साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामले में 20 दिन बाद कंपाउंडर पर FIR

राजस्थान की सुप्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की जोधपुर में संदिग्ध मौत के करीब 20 दिन बाद आखिरकार पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। बोरनाडा पुलिस स्टेशन में साध्वी को इंजेक्शन लगाने वाले कंपाउंडर देवी सिंह के खिलाफ चिकित्सा नियमों में लापरवाही का मामला दर्ज किया गया है। आरोप साबित होने पर आरोपी को अधिकतम 2 साल की सजा हो सकती है।

बता दे कि घटना 28 जनवरी की है, जब पाल रोड स्थित आरती नगर आश्रम में साध्वी की अचानक तबीयत खराब हो गई थी और सांस लेने में दिक्कत होने पर आश्रम में कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाया गया था उसने मौके पर ही साध्वी को डेक्सेना और डाइक्लोफेनिक सहित कुछ इंजेक्शन लगाए थे।

बताया जा रहा है कि इंजेक्शन लगाने के बाद उनकी हालत और बिगड़ गई। करीब 20 मिनट के भीतर स्थिति गंभीर हो गई और उन्हें प्रेक्षा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।

मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी ने अब तक साध्वी के पिता, सोशल मीडिया स्टाफ, रसोइए, कंपाउंडर और अस्पताल स्टाफ से पूछताछ की है। टीम ने मेडिकल बोर्ड से H शेड्यूल के इंजेक्शनों को लेकर कई तकनीकी सवाल किए थे।

सोमवार को मेडिकल बोर्ड से जवाब मिलने के बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। जांच टीम का दावा है कि पूछताछ के दौरान कंपाउंडर के बयान बदलते रहे और कई बिंदुओं पर विरोधाभास सामने आए।

कंपाउंडर का कहना था कि उसने तीन महीने पुरानी पर्ची के आधार पर इंजेक्शन लगाया।

बाद में दावा किया कि दवा मेडिकल स्टोर से खरीदी गई, लेकिन स्टोर संचालक ने इससे इनकार किया।

साध्वी अस्थमा की मरीज थीं, ऐसे में डाइक्लोफेनिक जैसे इंजेक्शन देने पर सवाल उठे हैं।

यदि स्थिति गंभीर थी तो अस्पताल ले जाने की सलाह क्यों नहीं दी गई?

पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार लगाए गए इंजेक्शन H शेड्यूल की श्रेणी में आते हैं, जिन्हें केवल डॉक्टर की लिखित पर्ची पर ही दिया या लगाया जा सकता है।

एफएसएल रिपोर्ट में मौत का कारण सांस संबंधी बीमारी बताया गया है। हालांकि, इंजेक्शन के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने और 20 मिनट में मौत होने को लेकर जांच एजेंसियां अभी भी सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं।

अब पुलिस कानूनी प्रक्रिया के तहत सबूतों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। यदि लापरवाही सिद्ध होती है तो आरोपी कंपाउंडर को सजा का सामना करना पड़ सकता है।