भाजपा और कांग्रेस में 2 साल की उपलब्धियां बनाम 5 साल का रिपोर्ट कार्ड—कौन जीतेगा बहस की बाजी?"

राजस्थान विधानसभा में 21 फरवरी को भाजपा सरकार के दो साल और कांग्रेस के पांच साल के कामकाज पर तीखी बहस होगी।

Feb 17, 2026 - 09:25
भाजपा और कांग्रेस में 2 साल की उपलब्धियां बनाम 5 साल का रिपोर्ट कार्ड—कौन जीतेगा बहस की बाजी?"

राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी टकराव देखने को मिलने वाला है। राज्य विधानसभा में 21 फरवरी को भाजपा सरकार के दो साल और कांग्रेस सरकार के पांच साल के कामकाज पर विशेष चर्चा तय की गई है। यह बहस मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा द्वारा कांग्रेस की चुनौती स्वीकार करने के बाद आयोजित की जा रही है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने राज्यपाल के अभिभाषण पर बहस का जवाब देते हुए सरकार के दो साल के कार्यकाल पर तैयार विस्तृत प्रतिवेदन सदन के पटल पर रखा था। इसी दौरान कांग्रेस की ओर से दी गई “दो साल बनाम पांच साल” की बहस की चुनौती को उन्होंने स्वीकार किया था। इसके बाद अब इस बहस के लिए सदन में दिन भी तय कर लिया गया है।

विधानसभा की कार्य सलाहकार समिति की बैठक में सदन का कामकाज 27 फरवरी तक तय किया गया है। समिति की सिफारिशों का प्रतिवेदन भी सदन में प्रस्तुत किया गया। तय कार्यक्रम के अनुसार 20 फरवरी 2026 तक विभिन्न विभागों की अनुदान मांगों को पारित किया जाएगा। इसके बाद 21 फरवरी को अनुदान मांगों पर चर्चा और पारण के साथ ही सरकार के दो साल के कामकाज पर विशेष चर्चा होगी। 21 फरवरी को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सीधी राजनीतिक बहस देखने को मिलेगी। भाजपा सरकार अपने दो साल के कार्यकाल की उपलब्धियां सदन के सामने रखेगी, जबकि कांग्रेस पिछली सरकार के पांच साल के कामकाज की तुलना करते हुए मौजूदा सरकार को घेरने की रणनीति अपनाएगी। इस दिन सदन में तीखी नोकझोंक और जोरदार बहस की पूरी संभावना है।

22 फरवरी को रविवार होने के कारण विधानसभा की कार्यवाही नहीं होगी। इसके बाद 23 से 26 फरवरी तक अलग-अलग विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा कर उन्हें पारित किया जाएगा। 27 फरवरी को विनियोग विधेयक और वित्त विधेयक पर बहस का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा महत्वपूर्ण घोषणाएं करेंगे। इसी दिन राजस्थान का बजट भी पारित किया जाएगा। राजनीतिक जानकारों के अनुसार 21 फरवरी का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। इस बहस से यह साफ होगा कि सरकार अपने दो साल के कार्यकाल को जनता के सामने किस तरह पेश करती है और विपक्ष किस तरह से तुलनात्मक आंकड़ों और मुद्दों के जरिए सरकार पर दबाव बनाता है। कुल मिलाकर, राजस्थान विधानसभा में आने वाले दिन सियासी रूप से काफी गर्म रहने वाले हैं