सीमावर्ती इलाकों में पानी बना धीमा जहर, MLA भाटी ने सरकार को घेरा

सीमावर्ती क्षेत्रों में दूषित पानी से बढ़ी बीमारियां, आरओ प्लांट बंद होने पर MLA भाटी का सरकार पर तीखा हमला

Feb 12, 2026 - 16:03
सीमावर्ती इलाकों में पानी बना धीमा जहर, MLA भाटी ने सरकार को घेरा

सीमावर्ती क्षेत्रों में पेयजल की गंभीर समस्या को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सरकार और प्रशासन पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन इलाकों में वर्षों से लोग मजबूरी में गुणवत्ताहीन पानी पीने को विवश हैं, जो धीरे-धीरे उनके और उनके परिवार के शरीर को भीतर से खोखला कर रहा है। यह स्थिति अब एक “धीमे जहर” में बदल चुकी है, जिसका असर हर वर्ग पर साफ दिखाई देने लगा है।

विधायक भाटी ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र शिव के कई गांवों में नवजात शिशुओं में दिव्यांगता की गंभीर समस्या सामने आ रही है। इसके साथ ही बच्चों और युवाओं में शारीरिक दिव्यांगता, मानसिक दुर्बलता, समय से पहले बुढ़ापा, दांतों और घुटनों से जुड़ी बीमारियां, हड्डियों में विकृति और फ्लोरेसिस जैसी असाध्य समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल स्वास्थ्य का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के भविष्य से जुड़ा संकट है।

भाटी ने कहा कि क्षेत्र में स्थापित 55 आरओ प्लांट में से करीब 30 प्लांट लंबे समय से बंद पड़े हैं। इससे स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही बताते हुए कहा कि यह स्थिति ग्रामीणों के जीवन और स्वास्थ्य को सीधे खतरे में डाल रही है। साथ ही प्रशासनिक संवेदनशीलता पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।

विधायक भाटी ने जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी मंत्री से आग्रह किया कि इस जानलेवा समस्या से लोगों को तुरंत राहत दिलाने के लिए ठोस और प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर समाधान जरूरी है। अपने बयान में भाटी ने सरकार पर मल्टीनेशनल कंपनियों के आगे झुकने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि बाड़मेर, जैसलमेर, बीकानेर और पूरे सीमावर्ती बेल्ट को कंपनियों के हितों के लिए गिरवी रखा जा रहा है। सरकार से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि अगर कुछ भला नहीं कर सकते तो कम से कम इस तरह किसी के हाथों में क्षेत्र को सौंपना बंद करें।

भाटी ने कहा कि सरकार गाय, ओरण, गोचर, पर्यावरण, देवी-देवताओं और धर्म की बात तो करती है, लेकिन दूसरी ओर यही सब चीजें खतरे में हैं। उन्होंने सरकार से अपील की कि अब समय आ गया है कि मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने मजबूती से खड़ा हुआ जाए। ऐसा करने पर आने वाला समय इस फैसले को जरूर याद रखेगा।